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FSSAI: क्या सच में एनर्जी देती हैं एनर्जी ड्रिंक्स? रेड बुल और पेप्सिको को नियामक के नोटिस से छिड़ी बहस

Thu, 02 Jul 2026 09:18 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आपका पसंदीदा एनर्जी ड्रिंक आपको गुमराह कर रहा है? FSSAI ने रेड बुल, पेप्सिको और कैम्पा जैसी बड़ी कंपनियों को भ्रामक दावों पर नोटिस जारी किया है। जानिए इसके पीछे के नियम और उपभोक्ता सुरक्षा पर इसके बड़े असर को।
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फूड इंडस्ट्री में एफएसएसएआई की सख्ती से हलचल। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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अगर आप भी थकान मिटाने या ध्यान केंद्रित करने के लिए 'एनर्जी ड्रिंक' का सहारा लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने रेड बुल, पेप्सिको इंडिया और कैम्पा सहित देश के कई बड़े बेवरेज ब्रांड्स को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 

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खाद्य नियामक ने इन कंपनियों को अपने प्रोडक्ट लेबल पर एनर्जी ड्रिंक शब्द का इस्तेमाल करने और कथित तौर पर गुमराह करने वाले दावे करने के खिलाफ कड़े कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। एफएसएसएआई की इस त्वरित कार्रवाई ने पूरी बेवरेज इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ग्राहकों के स्वास्थ्य और उनके भरोसे से जुड़ा मामला है।

सोशल मीडिया पोस्ट में खाद्य नियामक ने कहा कि उसने गलत ब्रांडिंग और लेबलिंग के नियमों के उल्लंघन को लेकर कई ब्रांड्स जैसे रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, हेल एनर्जी (हेल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड), कैम्पा एनर्जी ड्रिंक, मॉन्स्टर एनर्जी और पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के एड्रेनालिन रश और स्टिंग को नोटिस भेजे थे। एफएसएसएआई के अनुसार, 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' और इसके तहत बने नियमों और रेगुलेशन में एनर्जी ड्रिंक्स या ऐसे ही दूसरे प्रोडक्ट्स के लिए कोई स्टैंडर्ड तय नहीं किया गया है।
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नियामक ने स्पष्ट किया कि 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड प्रोडक्ट्स स्टैंडर्ड्स एंड फूड एडिटिव्स) रेगुलेशन, 2011' के तहत 'फूड कैटेगरी सिस्टम' का इस्तेमाल प्रोडक्ट का नाम रखने या लेबलिंग के मकसद से नहीं किया जाना चाहिए।

एफएसएसएआई ने आगे कहा कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत खाद्य उत्पादों के लिए ऐसे दावे करने को मंजूरी नहीं दी गई है जिनसे कार्यात्मक या चिकित्सीय फायदे का पता चले, जैसे कि एनर्जी लेवल बढ़ाना, फोकस बेहतर करना, शरीर और दिमाग को ताजगी देना, दिमाग को स्टिम्युलेट करना, शरीर को एनर्जी देना, आम कमजोरी में मदद करना आदि।

नियामक ने यह भी आरोप लगाया कि इन ब्रांड्स ने अपने प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग और लेबलिंग में 'एनर्जी ड्रिंक' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और ऐसे दावे किए जो मौजूदा नियमों के तहत मान्य नहीं हैं। ये नोटिस एफएसएसएआई की उन कोशिशों का हिस्सा हैं जिनका मकसद फूड और बेवरेज सेक्टर में गलत ब्रांडिंग और गुमराह करने वाले दावों पर रोक लगाना है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना है कि प्रोडक्ट्स के लेबल 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट' और उससे जुड़े नियमों का पालन करें।

इससे पहले जून में, रेगुलेटर ने कई फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (एफबीओ) को नोटिस भेजे थे। ये नोटिस प्रोडक्ट्स के बारे में गुमराह करने वाले दावों, ब्रांडिंग और लेबलिंग के तरीकों और ग्राहकों की शिकायतों से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आरोपों के कारण भेजे गए थे। साथ ही, उन्हें सुधार के कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए थे।

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