सीबीआई ने गुरुवार को यस बैंक और डीएचएफएल स्कैम मामले में छापेमारी करते हुए करोड़ों रुपये की पेंटिंग्स और घड़ियां बरामद की है। सीबीआई ने कहा है कि इन चीजों की खरीदारी बैंक के पैसों का दुरुपयोग करते हुए की गई थी।
सीबीआई की ओर से छापेमारी की यह कार्रवाई यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाली 17 बैंकों के समूह के लगभग 34615 करोड़ रुपये की गड़बड़ी मामले की जांच के दौरान गई।
सीबीआई ने छापेमारी के दौरान एफएन साउजा (1964) और एसएस राजा (1956) की बनाई दो पेंटिंग्स बरामद की है जिनकी अनुमानित कीमत 5.50 करोड़ रुपये है। छापेमारी में जेकब एंड कंपनी और फ्रैंक मूलर जेनेवे कंपनी की पांच करोड़ रुपये मूल्य की दो घड़ियां और लगभग दो करोड़ रुपये के आभूषण जिनमें चूड़ियां और गले का हार शामिल हैं, बरामद किए गए हैं।
बता दें कि इस मामले में आरोपितों पर बैंकों के पैसों का दुरुपयोग करते हुए महंगी चीजों की खरीदारी के आरोप लगे थे। मामले की जांच के दौरान यस बैंक और डीएचएफएल दोनों ही कंपनियों के तत्कालीन सीएमडी व निदेशकों को गिरफ्तार किया गया था और दोनों फिलहाल सीबीआई की कस्टडी में हैं।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने इस मामले में 20 जून 2022 को मुंबई स्थित इंडस्ट्रियल फाइनेंस ब्रांच में केस दर्ज कराया था। शिकायत में कहा गया था कि आरोपितों ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के समूह से ऋण लेकर उन्हें शेल कंपनियां बनाकर गलत तरीके से खर्च किया।
मुकेश अंबानी को 33 साल पुराने मामले में गवाह के तौर पर बुलाने की याचिका का सीबीआई ने किया विरोध
सीबाआई ने 33 साल पुराने हत्या के प्रयास के एक मामले में उद्योगपति मुकेश अंबानी को गवाह के तौर पर बुलाए जाने की एक याचिका का विरोध किया किया है। वर्ष 1989 में उद्योगपति नुस्ली वाडिया पर हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपित इवाना सिक्वेरा नाम के एक व्यक्ति ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट में अपील दाखिल कर इस मामले में मुकेश अंबानी को गवाह के तौर पर बुलाने की मांग की थी।
इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने जवाब देते हुए कहा है कि मामले में आरोपित के पास वर्तमान स्तर पर और अधिक जांच की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए इस अपील को खारिज कर दिया जाना चाहिए।
बता दें कि कीर्ति अंबानी नाम के एक व्यक्ति जो रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड से एक सीनियर एग्जीक्यूटिव के तौर पर जुड़े हुए थे उनकी इस मामले के ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है, वे इस मामले के मुख्य आरोपित थे।
क्या था मामला?
31 जुलाई 1989 को कीर्ति अंबानी और अन्य के खिलाफ बॉम्बे डाईंग कंपनी के तत्कालीन चेयरमैन वाडिया पर व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के कारण जान से मारने की नीयत से हमला करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराया गया था। इस मामले की जांच महाराष्ट्र सरकार ने दो अगस्त 1989 को सीबीआई को दिया था। इस मामले में ट्रायल साल 2003 में शुरू हुआ।