सरकार महामारी से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए आयात घटाने पर जोर दे रही है। वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने घरेलू कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए चीन से आयातित रसायन 'पॉलिथिलीन टेरिफ्थेलेट' (पेट रेजिन) पर अस्थायी तौर पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने की सिफारिश की है।
इन कंपनियों ने दिया जांच के लिए आवेदन
डीजीटीआर ने चीनी कंपनियों की पेट रेजिन की कथित डंपिंग की जांच के बाद 200.66 डॉलर प्रति टन तक की दर से शुल्क लगाने की सिफारिश की है। घरेलू विनिर्माताओं की शिकायत के बाद डंपिंग की प्रारंभिक जांच की गई थी। धनसेरी पेट्रोकेम इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और रिलयंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने डंपिंग रोधी जांच शुरू करने को लेकर आवेदन दिए थे। डीजीटीआर ने अधिसूचना में कहा कि घरेलू कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए जांच पूरी होने तक अस्थायी तौर पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाना जरूरी है।
इन कामों में होता है इस्तेमाल
रेजिन का उपयोग प्रीफॉर्म के विनिर्माण में किया जाता है। उसके बाद उसे पीईटी बोतल और जार में तब्दील किया जाता है। इसका उपयोग 'मिनरल वॉटर', कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक, खाद्य तेल और औषधि उत्पादों आदि रखने में किया जाता है।
कई क्षेत्रों में विनिर्माण बढ़ाने की तैयारी: गडकरी
मालूम हो कि केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि चीन से आयात घटाने के लिए कई क्षेत्रों में विनिर्माण बढ़ाने की तैयारी है। वैश्विक स्तर पर भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में एमएसएमई की बड़ी भूमिका होगी।
फिक्की के कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह समय आयात पर निर्भरता घटाकर निर्यात बढ़ाने का है। वैश्विक विनिर्माण में अभी चीन की हिस्सेदारी 30 फीसदी और इलेक्ट्रिक मशीनरी व औजार सहित 10 ऐसे निर्यात क्षेत्र हैं जहां चीन की भागीदारी 70 फीसदी तक है।
हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि एमएसएमई को किस तरह विकसित करें जिससे विनिर्माण को बढ़ाकर मौजूदा हालात में वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बेहतर कर सकें। भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए कृषि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, खादी और ग्रामोद्योग जैसे क्षेत्रों में निर्यात बेहतर करने की जरूरत है।