Civil Aviation: नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हाल के महीनों में कई वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही स्पाइसजेट की निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि, विमानन कंपनी ने इस तरह के किसी भी घटनाक्रम से इनकार किया है। वहीं गो फर्स्ट मामले में भी नया अपडेट सामने आया है।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हाल के महीनों में कई वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही स्पाइसजेट की निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि, विमानन कंपनी ने इस तरह के किसी भी घटनाक्रम से इनकार किया है।
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यह ऐसे समय में हुआ है जब विभिन्न पट्टेदार स्पाइसजेट को पट्टे पर दिए गए विमानों के पुन: कब्जे की मांग कर रहे हैं और कुछ मामलों को एयरलाइन द्वारा सुलझा लिया गया है। अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने स्पाइसजेट को तीन सप्ताह से अधिक समय से निगरानी में रखा है और यह एक सतत प्रक्रिया है।
दूसरी ओर, विमानन नियामक डीजीसीए मुंबई और दिल्ली में चार से छह जुलाई तक ग्राउंडेड गो-फर्स्ट विमानों का ऑडिट पूरा करने के बाद विशेष ऑडिट रिपोर्ट का विश्लेषण कर रहा है। नियामक की ओर से बताया गया कि विशेष ऑडिट सुरक्षा से संबंधित पहलुओं के साथ-साथ उड़ान संचालन को फिर से शुरू करने के लिए की गई व्यवस्थाओं के भौतिक सत्यापन पर केंद्रित है।