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डीजीसीए का बड़ा आदेश: सभी एयरलाइनों के पायलट्स के लिए ड्रग परीक्षण अनिवार्य, जानें 2027 तक कैसे चलेगा अभियान

Thu, 10 Sep 2026 04:52 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी एयरलाइंस के पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण अनिवार्य किया है, जिसे जुलाई 2027 तक पूरा करना होगा। यह फैसला फुकेत-दिल्ली उड़ान घटना के बाद आया है, जिसमें एक पायलट ड्रग परीक्षण में पॉजिटिव पाया गया था।
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डीजीसीए - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी एयरलाइंस के पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण अनिवार्य कर दिया है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस अभियान को जुलाई 2027 तक पूरा करना होगा। यह बड़ा कदम हाल ही में हुई एक गंभीर विमानन घटना के बाद उठाया गया है। नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने भी इस महीने के अंत तक नए मानदंडों को अंतिम रूप देने की बात कही है।

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डीजीसीए ने पिछले महीने (अगस्त 2026) सभी एयरलाइंस को पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण का आदेश दिया था। एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके सभी पायलटों का परीक्षण जुलाई 2027 तक पूरा हो जाए। यह निर्णय एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के पायलट-इन-कमांड के ड्रग परीक्षण में पॉजिटिव पाए जाने की पृष्ठभूमि में आया है। 

4 अगस्त 2026 को हुई इस घटना में विमान ने अचानक करीब 300 फीट ऊंचाई खो दी थी। इस घटना में कई यात्री घायल हुए थे, जिससे विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे थे। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में पायलट द्वारा ड्रग के उपयोग को एक गंभीर चिंता बताया गया था। रिपोर्ट में डीजीसीए से उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था। इसके बाद 4 सितंबर 2026 को एयर इंडिया ने उस पायलट की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी थीं।

क्या है मौजूदा नियम और क्यों हुआ बदलाव?

वर्तमान में, पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण यादृच्छिक आधार पर किए जाते हैं। डीजीसीए के मौजूदा सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) के तहत, सालाना 10 फीसदी पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर सहित अन्य का साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए यादृच्छिक परीक्षण किया जाता है। देश में विभिन्न वाणिज्यिक एयरलाइंस में 12,000 से अधिक पायलट कार्यरत हैं। फुकेत उड़ान घटना और पायलट के ड्रग परीक्षण में पॉजिटिव पाए जाने के बाद, एयर इंडिया समूह ने अगस्त 2026 में ही अपने सभी पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण करने का निर्णय लिया था। इस घटना ने मौजूदा परीक्षण प्रणाली की पर्याप्तता पर सवाल खड़े किए थे।

फुकेत उड़ान में क्या हुआ था?

एएआईबी की 4 सितंबर 2026 को जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में फुकेत उड़ान घटना का विस्तृत विवरण दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, 145 लोगों को ले जा रहे विमान में 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते समय तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम लगभग एक साथ फेल हो गए थे। इससे ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया, एक संक्षिप्त स्टॉल चेतावनी मिली और ऊंचाई में गड़बड़ी हुई। इस गड़बड़ी के कारण 24 लोग घायल हो गए थे। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि उड़ान के बाद किए गए पुष्टिकरण परीक्षण में पायलट-इन-कमांड साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए गैर-नकारात्मक पाया गया था।

आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?

एएआईबी ने विमानन नियामक डीजीसीए को साइकोएक्टिव पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। उसने कहा था कि साइकोएक्टिव पदार्थ के उपयोग की पुष्टि एक गंभीर चिंता का विषय है और डीजीसीए को प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने गुरुवार (10 सितंबर 2026) को राष्ट्रीय राजधानी में एक सम्मेलन के दौरान बताया। उन्होंने कहा कि पायलटों के साइकोएक्टिव पदार्थों के परीक्षण से संबंधित संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) के मसौदे को इस महीने के अंत तक अंतिम रूप दिया जाएगा। यह हितधारकों के साथ चर्चा के बाद होगा।

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