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Market: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी की उम्मीद, मजबूत नीतिगत समर्थन से मिल रहा फायदा

Thu, 17 Jul 2025 06:52 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजारों में तेजी जारी रहने की उम्मीद है।पीएल कैपिटल ने निफ्टी के लिए 12 महीनों का टारगेट 26,889 तय किया है। आइए जानते हैं क्या है विशेषज्ञों की राय। 
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भारतीय शेयर बाजार - फोटो : एडोव
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विस्तार
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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स और नीतिगत समर्थन की वजह से भारतीय बाजारों में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। मैक्रो फंडामेंटल्स का मतलब है अर्थव्यवस्था के व्यापक पहलुओं का विश्लेषण करना, जैसे कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), मुद्रास्फीति, बेरोजगारी, और सरकारी नीतियां। इसका उपयोग  यह समझने के लिए किया जाता है कि ये कारक व्यक्तिगत कंपनियों, उद्योगों और समग्र रूप से बाजार को कैसे प्रभावित करते हैं। 

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स्मॉलकेस मैनेजर्स के अनुसार मार्च के निचले स्तर से निफ्टी के उबरने के साथ 26,300 पर पहुंचने की उम्मीद है। साथ ही ब्रेकआउट के साथ सूचकांक साल के अंत तक 27,500 प्लस तक पहुंच सकता है। 

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निफ्टी के 2025 के अंत तक 26,889 के स्तर पर पहुंचने की संभावना
वहीं पीएल कैपिटल के विशेषज्ञ कहते हैं कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बाद भी भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी इस साल के अंत तक 26,889 के स्तर तक पहुंच सकता है। घरेलू मांग में तेजी के कारण घरेलू क्षेत्र की कंपनियां बाजार में आगे बढ़ सकती है। हमारा मानना है कि अगले 12 महीनों में निफ्टी इंडेक्स में 6.5 प्रतिशत की बढ़त हो सकती है। पीएल कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार फार्मा, चुनिंदा कंज्यूमर स्टेपल्स, बैंकिंग, कैपिटल गुड्स, डिफेंस और पावर सेक्टर निकट भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। वहीं बुल केस (सकारात्मक) स्थिति में निफ्टी 28,957 तक के स्तर तक जा सकता है।

निवेशकों  को  सतर्कता बरतने की सलाह
ओम्नीसाइंस कैपिटल के स्मालकेस मैनेजर और सीईओ डॉ. विकास गुप्ता कहते हैं कि 2025 की दूसरी छमाही में प्रमुख कारकों पर ध्यान देना चाहिए। इसमें अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक व्यापार पर उसका असर का प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों का समाधान और यूके- भारत मुक्त व्यापार समझौता जैसे मुख्य द्विपक्षीय समझौता शामिल है। यह देश में कपड़ा, फार्मा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निर्यात क्षमता को खोल सकते हैं।

अमेरिकी मुद्रास्फीति पर निवेशकों की नजर
उन्होंने निवेशकों को सतर्कता बरतते हुए 2025 के बचे हुए महीनों में अमेरिकी मुद्रास्फीति के रुझानों पर नजर रखने की सलाह दी है। हालांकि, अमेरिकी मुद्रास्फीति अभी काफी सौम्य लग रही है, लेकिन अमेरिका में वस्तुओं की आपूर्ति और टैरिफ नीतियों के अनिश्चित प्रभाव की वजह से भविष्य में मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान धुंधला हो सकता है। वहीं अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता जल्द होने की उम्मीद है। और अमेरिका में वस्तुओं की आपूर्ति उचित कीमतों पर बनी रहती है, तो फेडरल बैंक दरों में कटौती कर सकता है, जो कि भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक होगा और विदेशी संस्थागत निवेशक का प्रवाह भी मजबूत होने की संभावना है।

ब्याज दरों में और कटौती की संभावना 
गुप्ता ने बताया कि ब्याज दरों में कटौती का दौर शुरू हो गया है । अगर मानसून सामान्य रहा और मुद्रास्फीति नियंत्रण में रही, तो रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में और कटौती हो सकती है। इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और हमारा मानना है कि बाजार औसत 5 वर्षीय पीई 25 पर वापस पहुंच जाना चाहिए। इसके अलावा, अगर आय वृद्धि अनुकूल रही, तो 2025 के अंत तक बाजार काफी उछाल पर आ सकता है।  5 वर्षीय पीई 25 का मतलब है, 5 साल की अवधि के लिए पीपीएफ (PPF) खाता है, जिसमें निवेशित राशि पर 7.5% की ब्याज दर मिलती है। 

बाजार ने वैश्विक उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव को अपनाना सीख लिया
पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट बताती है कि भारतीय शेयर बाजार ने बीते कुछ महीनों में कई बड़े घटानाक्रमों के बावजूद मजबूती दिखाई है। अब बाजार ने वैश्विक उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव को अपनाना सीख लिया है। वहीं देश के मोर्चे पर वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर में अच्छी तेजी देखी गई है। अप्रैल और मई में इसमें क्रमश: 61 प्रतिशत और 39 प्रतिशत की बढ़त रही है।

डिफेंस सेक्टर में हई सबसे अधिक बढ़त
इसमें सबसे अधिक बढ़त डिफेंस सेक्टर में रही है, जहां पिछले कुछ महीनों में ऑर्डरिंग और खर्च में वृद्धि हुई है। पीएल कैपिटल के संस्थागत इक्विटीज के निदेशक अनुसंधान अमनीश अग्रवाल कहते हैं हालांकि, व्यापक आधार पर सुधार अभी बाकी है, लेकिन कर राहत सामान्य मानसून, मुद्रास्फीति में कमी और कम ब्याज दरें जैसे कारणों से उपभोग संचालित सुधार के लिए परिस्थितियां बना रहे हैं। ग्रामीण उपभोक्ता खर्च करने के लिए आगे आ रहे हैं, जबकि शहरी भावनाएं धीरे-धीरे सुधर रही हैं। इसका असर बाजार पर देखने को मिलेगा।
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त्योहारों का मौसम और सामान्य मानसून भारतीय बाजारों में मांग को बढ़ा सकती है
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सभी का ध्यान उपभोक्ता मांग पर टिका है। इसकी वापसी की उम्मीद है। इसलिए निवेशक इन क्षेत्रों से जुड़ी हुई कंपनियों को प्राथमिकता भी दे रहे हैं। सामान्य मानसून, खाद्य मुद्रास्फीति में कमी और बजट में टैक्स कटौती जैसी वजहें मांग को बढ़ा  सकती हैं। हालांकि पहली तिमाही में कंपनियों के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। लेकिन त्योहारों का मौसम और सामान्य मानसून की स्थिति देश में भारतीय बाजारों में उपभोक्ता मांग की वापसी में अहम भूमिका निभा सकती है।

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