हालात सुधरने के कोई आसार नहीं - रिपोर्ट
पिछले तीन वर्षों में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और डब्ल्यूपीआर की दर में कटौती हुई है। जनवरी-अप्रैल 2016 से सितंबर-दिसंबर 2018 तक, एलएफपीआर में 5.8 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं डब्ल्यूपीआर की दर 2.8 फीसदी तक गिरी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में भी नौकरी का संकट बना रहेगा और इसमें सुधार की कोई संभावना नहीं है।
इन लोगों पर पड़ा असर
यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी से सबसे ज्यादा 20-24 वर्ष के युवक बेरोजगार हुए हैं और इससे पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा प्रभावित हुई हैं। साल 2016 और 2018 के बीच भारत में काम करने वाले पुरुषों की संख्या में एक करोड़ 61 लाख की वृद्धि हुई थी।
लेकिन डब्ल्यूपीआर में 5 मिलियन नौकरियों का नुकसान हुआ है। बता दें कि इस रिपोर्ट में केवल पुरुषों के आंकड़े ही शामिल है, महिलाओं के नहीं। अगर इसमें महिला कर्मचारियों के आंकड़े भी शामिल होते हैं तो इस संख्या में और इजाफा हो जाएगा।