भारत ने मई 2025 में रूस से थर्मल कोयले का आयात बढ़ाकर दो वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। यह जानकारी रूसी व्यापारिक दैनिक समाचार पत्र कोमर्सांट ने दी। कोमर्सेंट ने रूसी मूल्य सूचकांक केंद्र (सीसीआई) की व्यावसायिक समीक्षा का हवाला देते हुए बताया कि भारत ने मई में रूस से 1.3 मिलियन मीट्रिक टन कोयले का आयात किया। यह अप्रैल की तुलना में 52 प्रतिशत अधिक है। रिकॉर्ड से पता चला कि जून 2023 से रूस से मासिक निर्यात 1 मिलियन टन से अधिक नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों ने इस वृद्धि का श्रेय रूसी निर्यातकों की लचीली मूल्य नीति और उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को दिया है। हालांकि, बढ़ते घरेलू उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की उच्च लागत के कारण भारत में रूस की बाजार हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना नहीं है। फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान शिपमेंट स्तर को बनाए रखना पूरी तरह संभव है।
रिपोर्ट में बिगमिंट के आंकड़ों का हवाले से कहा गया कि भारत का कुल थर्मल कोयला आयात मई में 17.4 मिलयन टन तक पहुंच गया। यह जून 2024 के बाद का उच्चतम स्तर है। इसमें रूस की हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत रही। इंडोनेशिया अब भी भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। इसने पिछले महीने की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9.8 मिलियन टन कोयला निर्यात किया। दक्षिण अफ्रीका से आयात अप्रैल के स्तर 3.4 मिलियन टन पर बना रहा, जबिक अमेरिका से कोयले की आपूर्ति 43 प्रतिशत बढ़कर 2 मिलियन टन हो गई।
नेशनल क्रेडिट रेटिंग्स के निदेशक नरीमन ताइकेंटायेव ने बताया कि बाजार की अनुकूल स्थितियों के चलते भारत ने कम कैलोरिफिक वैल्यू वाले इंडोनेशियाई कोयले की तुलना में उच्च गुणवत्ता वाले रूसी कोयले को प्राथमिकता दी, जो प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध है। हालांकि, मजबूत रूबल और ईरान में अस्थिरता जैसे कारक रूसी निर्यातकों की संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं, जो पहसे से ही 12 दिनों के इस्राइल-ईरान युद्ध के दौरान अनिश्चितता से जूझ रहे थे।