दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन बेचे जा रहे सामान पर निर्माता देश के नाम दिखाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र और अन्य संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर बिक्री के लिए पेश किए गए उत्पादों पर एमआरपी, विक्रेता विवरण, निर्माता का नाम और निर्माता का देश को लेकर ई-कॉमर्स वेबसाइटों को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है।
यह मामला पिछले साल से ही चल रहा है। चीन सीमा विवाद के बाद इस मामले में काफी तूल पकड़ा था जिसके बाद कई चाइनीज कंपनियों के प्रोडक्ट लोगों ने फेंके थे और कईयों का बहिष्कार हुआ था। उसके बाद कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी जिसमें मांग की गई थी कि ई-कॉमर्स साइट पर बिकने वाले सभी प्रोडक्ट पर प्रोडक्ट की एमआरपी के साथ उसके उत्पादन, उत्पादक, प्रोडक्ट की मूल कंपनी और मूल देश जैसी जानकारी दी जाए।
सीमा पर चीन के साथ हुई हिंसा के बाद कारोबारी संगठनों ने खुदरा विक्रेता से चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने का आह्वान किया था। इसके बाद उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने सरकार से ई-कॉमर्स कंपनियों से भी हर उत्पाद के आगे उसके मूल देश का नाम लिखने का निर्देश देने की अपील की थी ताकि ग्राहक खरीदने से पहले जान सके कि सामान कहां बना है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और ई-कॉमर्स वेबसाइटों का स्वामित्व करने वाली ओ(1) इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सोशियोफाई एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड और फैशनियर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किए और 12 मार्च तक याचिका पर अपना रुख बताने को कहा। याचिका में दावा किया गया है कि उपभोक्ता ई-कॉमर्स मंचों पर इन विवरणों का उल्लेख नहीं किये जाने को लेकर काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता एवं गाजियाबाद निवासी अजय कुमार सिंह ने कहा कि वह नियमित रूप से ई-कॉमर्स वेबसाइटों से खरीदारी करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने काफी छानबीन की और पाया कि उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 और विधिक मापतौल (पैक की हुई वस्तुएं) नियम, 2011 का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, 'यदि ये ई-कॉसर्म वेबसाइट एमआरपी, विक्रेता का विवरण, विनिर्माण का देश/उत्पाद के मूल देश का उल्लेख नहीं करना जारी रखेंगी, तो पूरे राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। किसी वस्तु की एमआरपी प्रदर्शित नहीं किये जाने पर उपभोक्ताओं को विनिर्माता की ओर से निर्धारित अधिक कीमत पर वस्तु को खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।'