आगामी केंद्रीय बजट में सरकार को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। इससे दिवाला मामलों का निपटारा तेज और प्रभावी हो पाएगा। यह बात अनूप रावत, नेशनल प्रैक्टिस हेड, ने कही।
रावत ने कहा कि आईबीसी लागू होने के बाद निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार आर्थिक हालात के अनुसार कोड में समय-समय पर संशोधन करती रही है चाहे वह महामारी जैसी परिस्थितियां हों या फिर कर्जदाताओं और अन्य हितधारकों की अपेक्षाएं।
उन्होंने कहा कि अनुभव के आधार पर सरकार ने क्रेडिटर-लेड रेजोल्यूशन फ्रेमवर्क और क्रॉस-बॉर्डर इन्सॉल्वेंसी जैसे अहम और दूरगामी संशोधन किए हैं, जो आगे चलकर निवेशकों के भरोसे को और मजबूत करेंगे।
आईबीसी की मौजूदा चुनौतियों पर बात करते हुए रावत ने कहा कि मामलों में देरी और कम रिकवरी अब भी एक मुद्दा है, लेकिन यह किसी भी नए कानून के स्थिरीकरण चरण में सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो आईबीसी ने अब तक असाधारण रूप से अच्छा काम किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि संस्थागत मजबूती और बेंच स्ट्रेंथ बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में अभी और ध्यान देने की जरूरत है।
नए IBC संशोधनों पर रावत ने कहा कि ये निश्चित रूप से समाधान प्रक्रिया को तेज करेंगे। उन्होंने बताया कि नए प्रावधानों का उद्देश्य विवादपूर्ण प्रक्रिया की बजाय सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।
एनसीएलटी और एनसीएलएटी पर बढ़ते मामलों को लेकर रावत ने कहा कि यह अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है और मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ये संस्थान हमेशा व्यस्त रहेंगे, लेकिन नए संशोधनों के बाद मामलों को स्वीकार करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।