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Goldman Sachs: निर्यात को मजबूत कर रहा देश का रक्षा उत्पादन, वैश्विक बाजार में बढ़ रही भारत की हिस्सेदारी

Mon, 06 Oct 2025 02:38 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत का रक्षा निर्यात वित्तीय वर्ष 2014 में 6.8 अरब रुपये से बढ़कर FY25 में 236 अरब रुपये तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि न केवल घरेलू उद्योग को मजबूती देती है, बल्कि भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में हिस्सेदारी को भी बढ़ा रही है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के घरेलू रक्षा क्षेत्र में विकास का प्रमुख चालक अब निर्यात बन गया है। सरकार आने वाले वर्षों में देश की वैश्विक मौजूदगी को काफी बढ़ाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर रही है।

रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 236 अरब रुपये तक पहुंचा

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रक्षा निर्यात वित्तीय वर्ष 2014 में 6.8 अरब रुपये से बढ़कर FY25 में 236 अरब रुपये तक पहुंच गया है। रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य इसे FY27 तक 350 अरब रुपये और FY29 तक 500 अरब रुपये तक ले जाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि न केवल घरेलू उद्योग को मजबूती देती है, बल्कि भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में हिस्सेदारी को भी बढ़ा रही है।

100 से ज्यादा देश भारत निर्मित प्रणालियों का आयात कर रहे

रिपोर्ट में कहा गया है कि 100 से ज्यादा देश पहले से ही छोटे हथियारों और युद्ध सामग्री से लेकर उन्नत उप-प्रणालियों तक, भारत में निर्मित प्रणालियों और कलपुर्जों का आयात कर रहे हैं। कुल उत्पादन मूल्य में केवल 35 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद, निजी कंपनियां कुल निर्यात में 65 प्रतिशत का योगदान दे रही हैं।

वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए देश को क्या करने की जरूरत?

अनुमानित 100 अरब डॉलर के वैश्विक हथियार बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए, भारतीय रक्षा कंपनियों को सिर्फ पुर्जी से आगे बढ़कर संपूर्ण प्रणालियां और प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने होंगे। मित्र देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका तोपखाना प्रणाली और आकाश वायु रक्षा प्रणालियों जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म में पहले ही रुचि दिखाई है।

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रिपोर्ट में निर्यात के लिए तैयार प्रमुख उत्पादों की पहचान की गई है, जिनमें स्वदेशी एवियोनिक्स से लैस तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान, प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर, नौसैनिक फ्रिगेट और कॉर्वेट, और आकाश-एनजी व क्यूआरएसएएम जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियां शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय कंपनियां एयरोस्पेस निर्माण में इस्तेमाल होने वाली उच्च-मूल्य वाली सामग्रियों, जैसे टाइटेनियम और सुपर अलॉयज, के क्षेत्र में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।

भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश है, लेकिन रक्षा उपकरणों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक भी है। देश अब अपने लड़ाकू विमान, उपग्रह और रडार खुद डिजाइन और बनाता है, और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता काफी कम कर चुका है। 
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सोने का भाव - फोटो : PTI

सोना लंबी अवधि का भरोसेमंद निवेश

गोल्डमैन सैक्स ने सोने को अपना सबसे भरोसेमंद लंबी अवधि का कमोडिटी बताया है। विश्लेषकों ने कहा कि निजी और संस्थागत मांग में तेजी, इक्विटी ट्रेडेड फंड्स (ETF) में बढ़ती होल्डिंग्स और केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार खरीद इसके प्रमुख कारक हैं। इन कारणों से सोने की कीमतों में हालिया तेजी देखी गई है, जो करीब 47 प्रतिशत बढ़कर लगभग 3,865 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है। 

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अगस्त से सोना 14 प्रतिशत की तेजी से कारोबार कर रहा

इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 3,937 डॉलर प्रति औंस कारोबार कर रहा था। भारत में यह पीली धातु लगभग 1.21 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम कारोबार कर रही है। गोल्डमैन की रिपोर्ट के अनुसार सोना अगस्त से 14 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,200 से 3,450 डॉलर प्रति औंस की अपनी सीमा से बाहर आ गया है। 

दिसंबर 2026 तक 4300 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचने का अनुमान

इसमें कहा गया है कि मध्य 2026 तक सोने के लिए 4,000 डॉलर प्रति औंस और दिसंबर 2026 तक 4,300 डॉलर प्रति औंस यानी ₹121670 प्रति 10 ग्राम के मूल्य अनुमान में तेजी के जोखिम और अधिक बढ़ गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया तेजी में सट्टेबाजी की भूमिका सीमित रही है। इसके बजाय यह निवेशकों के व्यवहार में बड़े और गहरे बदलाव 

रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को सोने को न केवल विकास के लिए एक बचाव के रूप में देखना चाहिए, बल्कि वैश्विक व्यापक आर्थिक अनिश्चितता के बीच एक प्रमुख पोर्टफोलियो स्थिरता के रूप में भी देखना चाहिए।

 
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