प्रमुख विकसित बाजारों में मांग में सुस्ती के कारण चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में देश का रत्न एवं आभूषण निर्यात 0.75 फीसदी गिरावट के साथ 13.18 अरब डॉलर का रहा। रत्न एवं आभूषण संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-अगस्त अवधि में कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात 13.28 अरब डॉलर का रहा था। श्रम-गहन क्षेत्र देश के कुल निर्यात में लगभग 14 फीसदी का योगदान करता है।
निर्यात में यह गिरावट मूलत: चांदी के जेवरों, स्वर्ण पदक तथा सिक्कों का निर्यात घटने के साथ ही माल के वापस आने के मामलों में वृद्धि की वजह से हुई है। उद्योग के विशेषज्ञों के मुताबिक, निर्यातक इस बात से आशान्वित हैं कि त्योहारी मौसम में चीजों में सुधार दिखना शुरू होगा।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-अगस्त में चांदी के जेवरों का निर्यात 88 फीसदी सिकुड़कर 23.9 करोड़ डॉलर का रहा। इसी तरह, आलोच्य अवधि में स्वर्ण पदकों तथा सिक्कों के निर्यात में 87.2 फीसदी की सिकुड़न देखने को मिली।
चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीने में कच्चे हीरे के निर्यात में भी पांच फीसदी की गिरावट रही। हालांकि, तराशे और पॉलिस हीरे का निर्यात 11.5 फीसदी वृद्धि के साथ 10.31 अरब डॉलर का रहा। आलोच्य अवधि में सोने के जेवरों का निर्यात हालांकि लगभग दोगुना बढ़कर 5.11 अरब डॉलर का रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 2.70 अरब डॉलर का रहा था।