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ट्रंप और पेंटागन से भिड़ने वाले बागी जीनियस: कौन हैं एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई? पढ़िए उनकी दिलेर कहानी

Sat, 28 Feb 2026 06:57 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

380 अरब डॉलर की एआई कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई की कहानी बहुत रोचक है। अब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे अदावत मोल ली है। ट्रंप प्रशासन ने उनकी कंपनी को ही सुरक्षा के लिए सप्लाई चेन से जुड़ा खतरा बता दिया है। उनकी पूरी कहानी पढ़ें।
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एंथ्रोपिक एआई - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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दुनिया की सबसे ताकतवर सरकार और 380 अरब डॉलर की मूल्यांकन वाली दिग्गज एआई कंपनी के बीच तल्खी अपने परवान पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी संघीय एजेंसियों को एंथ्रोपिक के एआई टूल्स का इस्तेमाल तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। इसकी मुख्य वजह एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई का वह सख्त रुख है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी सेना को अपने एआई टूल्स के बेरोकटोक इस्तेमाल की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से कंपनी को 'सप्लाई चेन रिस्क' घोषित किए जाने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। आइए आसान सवाल-जवाब के जरिए जानते हैं कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली रक्षा विभाग से अदावत मोल लेने वाले डारियो अमोदेई आखिर हैं कौन।

डारियो अमोदेई कौन हैं और उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट क्या था?

1983 में सैन फ्रांसिस्को में जन्मे डारियो अमोदेई बचपन से ही विज्ञान और भौतिकी में गहरी रुचि रखते थे। उनके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आया, जब 2006 में उनके पिता का एक दुर्लभ बीमारी से निधन हो गया। पिता को खोने के झटके ने अमोदेई को सैद्धांतिक भौतिकी छोड़कर जीव विज्ञान (बायोलॉजी) की ओर मोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनका लक्ष्य बीमारियों का सटीक इलाज खोजना था, ताकि जो उनके पिता के साथ हुआ, वह किसी और के साथ न हो।

जीव विज्ञान से दुनिया की दिग्गज एआई कंपनी तक का सफर कैसे तय हुआ?

बायोलॉजिकल समस्याओं को सुलझाते हुए अमोदेई को एहसास हुआ कि इंसान की क्षमताएं सीमित हैं और जटिल बीमारियों को समझने के लिए हजारों शोधकर्ताओं की जरूरत है। इसी कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की ओर रुख किया। उन्होंने टेक कंपनी बायडू में काम किया, जहां उन्होंने 'एआई स्केलिंग लॉज' को समझने में अहम भूमिका निभाई। इसका अर्थ है अधिक डेटा और कंप्यूटिंग पावर से एआई के प्रदर्शन में बेहतरीन सुधार करना।

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अमोदेई का ओपनएआई से क्या नाता रहा और उन्होंने इसे क्यों छोड़ा?

2016 में डारियो ने ओपनएआई ज्वाइन किया और GPT-2 और GPT-3 जैसे बड़े एआई मॉडल्स को विकसित करने के अभियान का नेतृत्व किया। हालांकि, जैसे-जैसे तकनीक उन्नत होती गई, अमोदेई की एआई सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ने लगीं। यह बात ओपनएआई के नेतृत्वकर्ताओं को रास नहीं आई। इसके बाद, उनके साथ तकनीक के कॉमर्शियलाइजेशन और सुरक्षा के मुद्दों पर डारियो के गहरे मतभेद पैदा हो गए। नतीजा यह हुआ कि, दिसंबर 2020 में अमोदेई ने अपनी बहन डेनिएला और कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर ओपनएआई को अलविदा कह दिया।

एंथ्रोपिक की कारोबारी सफलता कितनी बड़ी है?

2021 में अमोदेई ने एंथ्रोपिक की नींव रखी और लोकप्रिय एआई चैटबॉट 'क्लॉड' (Claude) की शुरुआत की। कंपनी ने कंज्यूमर की बजाय बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) मॉडल पर फोकस किया। आज फाइजर और यूनाइटेड एयरलाइंस जैसी दुनिया की दिग्गज कंपनियां उनके ग्राहक हैं। जुलाई 2025 तक कंपनी की सालाना रिकरिंग रेवेन्यू यानी एआरआर 4.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, और हालिया मूल्यांकन के मुताबिक कंपनी की कुल कीमत 380 अरब डॉलर आंकी गई है।

पेंटागन के साथ एंथ्रोपिक का विवाद क्यों शुरू हुआ?

एआई के मोर्चे पर रोज तेजी से बदलते परिदृश्य के बीच अमोदेई नहीं चाहते कि उनके एआई टूल्स का इस्तेमाल 'बड़े पैमाने पर घरेलू निगरानी' या 'पूरी तरह से स्वायत्त हथियारों' यानी ऑटोनॉमस वेपंस के लिए हो। यही कारण है कि जब पेंटागन ने 20 करोड़ डॉलर के सौदे के तहत कंपनी के टूल्स के किसी भी कानूनी इस्तेमाल की मांग की तो अमोदेई इससे सहमत नहीं थे। उन्होंने पेंटागन के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने छह महीने के भीतर सरकारी कामकाज से एंथ्रोपिक को बाहर का रास्ता दिखाने का आदेश दे दिया है। पेंटागन में एआई से जुड़ा काम ओपन एआई को सौंपने की खबरें हैं। यहां एक दिलचस्प बात यह है कि प्रतिद्वंद्वी कंपनी ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी अमोदेई की सुरक्षा नीतियों (रेड लाइन्स) का समर्थन किया है।

क्या अमोदेई एआई को बढ़ने देने से रोकना चाहते हैं?

अमोदेई खुद को 'डूमर' (एआई के विकास का विरोधी) कहे जाने पर सख्त एतराज जताते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि एआई का विकास तेजी से होना चाहिए ताकि इंसानी बीमारियों का जल्द इलाज मिल सके। उनका लक्ष्य तकनीक को रोकना नहीं, बल्कि उसका सुरक्षित विकास सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में एआई खुद को बेहतर बनाते हुए इंसानों के ही नियंत्रण से बाहर न हो जाए। कुल मिलाकर, डारियो अमोदेई की कहानी एक ऐसे तकनीक के क्षेत्र के एक ऐसे लीडर की है, जिसने मुनाफे और सरकारी दबाव से ऊपर अपने उसूलों को चुना। ट्रंप प्रशासन और रक्षा विभाग के सामने डटे रहने का उनका फैसला भविष्य में ग्लोबल एआई गवर्नेंस, सुरक्षा मानकों और तकनीक के सैन्य उपयोग पर होने वाली बहस के लिए एक बड़ी नजीर साबित होगा।

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