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दिहाड़ी मजदूरों को भी मिलेगी पक्की नौकरी, CII को बस सरकार से गाइडलाइन का इंतजार

Fri, 27 Apr 2018 11:04 AM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संगठित क्षेत्र या लघु एवं मंझोले उपक्रमों (एसएमई) में काम कर रहे दिहाड़ी मजदूरों और आउटसोर्स मजदूरों को अब शीघ्र ही पक्की नौकरी मिल सकेगी। इसके लिए उद्योग जगत पूरी तरह से तैयार है। बस इंतजार है तो सरकार की तरफ से इस बारे में गाइडलाइन जारी होने का, जिसके बाद निजी क्षेत्र में भी सुधार का काम शुरू हो जाएगा।

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अमर उजाला से विशेष बातचीत में उद्योग परिसंघ ( सीआईआई ) के अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल ने बताया कि उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात में केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसी साल की शुरुआत में बताया था फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रेक्ट से संबंधित अधिसूचना शीघ्र ही जारी कर दी जाएगी।

उसके बाद सरकार की तरफ से इसके लिए गाइडलाइन भी जारी कर दी जायेगी ताकि उस पर अमल हो सके। अब जब सरकार ने पिछले महीने की 16 तारीख को फिक्स्ड टर्म कांट्रेक्ट की अधिसूचना जारी कर दी है, तो अब उद्योग जगत को इसकी गाइडलाइन का इंतजार है। इस बीच उद्योग इसके लिए तैयारी कर रहा है।

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मिलेगी पक्की नौकरी के समान सुविधाएं

मित्तल का कहना है कि इस समय श्रम कानून की पेचीदगियों की वजह से नियोक्ता के हाथ श्रमिकों के मामले में बंध जाते हैं। इसलिए न सिर्फ बड़ी कंपनियां, बल्कि छोटी-छोटी कंपनियां भी आउटसोर्स या एडहॉक और दिहाड़ी (कैजुअल) मजदूरों के सहारे काम चलाने लगे हैं।

इसी स्थिति में सुधार लाने के लिए जब ईज आफ डूइंग बिजनेस का खाका खींचा जा रहा था, उसी समय मजदूरों से संबंधित कानून का मसला भी उठा था। इसके बाद ही फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रेक्ट का मार्ग प्रशस्त हुआ। अब दिहाड़ी मजदूरों, एडहॉक मजदूरों और आउटसोर्स मजदूरों को कॉन्ट्रेक्ट पर रखा जा सकेगा। इन मजदूरों को भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा निगम की सुविधा या स्वास्थ्य, प्रसूति तथा अन्य सुविधा स्थायी कर्मचारियों की तरह ही मिलेगी।

आउटसोर्स मजदूरों में नौकरी छोड़ने की दर थी ज्यादा
सीआईआई के अध्यक्ष के मुताबिक, यूं तो उद्योग जगत जटिल श्रम कानूनों से बचने के लिए आउटसोर्सिंग का सहारा ले रहे हैं, लेकिन उसमें नौकरी छोड़ने की दर ज्यादा है। उनके मुताबिक मजदूरों को प्रशिक्षित करने और खास उद्योग के अनुरूप ढालने में काफी दिन लगता है और काफी राशि का भी निवेश करना होता है।

लेकिन आउटसोर्सिंग में देखा गया है कि मजदूरों का नौकरी बदलने का प्रतिशत ज्यादा है। इसलिए फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रेक्ट के जरिये अब मजदूरों के अनुबंध को आवधिक आधार पर बढ़ाया जाएगा जिससे उद्योग और मजदूर, दोनों वर्ग को सहूलियत होगी।

श्रमिक संगठन कर रहे हैं विरोध
उद्योग जगत भले ही फिक्स्ड टर्म कांट्रेक्ट का समर्थन कर रहे हों, लेकिन मजदूर संगठन सरकार की इस अधिसूचना का विरोध कर रहे हैं। केरल में तो बीते दो अप्रैल को इसी मसले पर एक दिवसीय हड़ताल का भी आयोजन भी हो चुका है। इसके विरोध में न सिर्फ वामपंथी मजदूर संगठन झंडा उठाये हुए हैं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परिवार का सदस्य भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) भी सैद्धांतिक तौर पर ऐसे श्रम कानून के खिलाफ है।

मजदूर संगठनों का कहना है कि बीते 16 अप्रैल को जो फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रेक्ट की अधिसूचना जारी हुई है, उससे मजदूरों की नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं रहेगी। नियोक्ता जब चाहेंगे, भर्ती कर सकेंगे और जब चाहे उन्हें निकाल सकेंगे। 
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