एजेंसी के मुताबिक, गैर-कर राजस्व 2.45 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान के मुकाबले 16,200 करोड़ रुपये कम होने की आशंका है। यह सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और आरबीआई के लाभांश, संचार सेवाओं से कम प्राप्ति और कम विघटन के लिए जिम्मेदार है।
आरबीआई के मामले में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक ने मार्च, 2018 से पहले सरकार को वित्त वर्ष 2018 के मुनाफे से अंतरिम लाभांश दिया था, जिस कारण लाभांश प्राप्ति में कमी आएगी। वहीं, विघटन के मामले में कहा गया है कि पहली छमाही में 80,000 करोड़ रुपये के बजट लक्ष्य के मुकाबले केवल 15,247 करोड़ की प्राप्ति हुई।
करना पड़ा रहा दबावों का सामना
एजेंसी ने आगे कहा है कि पहली छमाही में राजस्व व्यय वृद्धि बजट आंकड़ों से कम है, लेकिन खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में तेजी से बढ़ोतरी और आयुष्मान भारत योजना के कार्यान्वयन से दबावों का सामना करना पड़ता है। एजेंसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि पूंजीगत व्यय को कम कर सरकार फिर से राजस्व घाटे में कुल व्यय और प्राप्तियों में कमी के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने की कोशिश करेगी। सरकार बार-बार कह रही है कि वह समग्र राजकोषीय रोडमैप के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करेगी।
आरबीआई से पैसे की जरूरत नहीं
पिछले शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार को आरबीआई से पैसे लेने की जरूरत नहीं है। वित्तीय वर्ष के पहले छमाही के लिए यह अंतर 5.9 4 लाख करोड़ रुपये के बजट स्तर के 95 फीसदी तक पहुंच गया था।