यदि क्रूड की वर्तमान स्थिति की बात करें तो ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार अगर क्रूड में यही गिरावट जारी रही तो ब्रेंट क्रूड 40 से 42 डॉलर प्रति बैरल तक का स्तर छू सकता है। इस तरह कच्चे तेल की कीमतों में कमी आना न सिर्फ भारत, बल्कि अन्य विकासशील देश, जिनकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार तेल है। वे सभी निश्चित रूप से फायदे में रहेंगे।
और सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल
फिलहाल अगले तीन महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम गिरते रहेंगे, जिसका फायदा आम लोगों को मिलेगा। पेट्रोल-डीजल के सस्ता होने से महंगाई से राहत मिलेगी, वहीं लोगों के मासिक घरेलू बजट में भी इसका असर देखने को मिलेगा। फल-सब्जियां, खाने-पीने का अन्य सामान सस्ता होने से लोगों को काफी बचत होगी। इस बचत से वो कहीं भी निवेश कर सकते हैं, जो भविष्य में उनके लिए मददगार साबित होगा।
कम होगा आयात बिल
कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा होने और रुपये के प्रति डॉलर 70 के भी ऊपर चले जाने से पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल का अनुमान था कि वित्त वर्ष 2018-19 में आयात बिल 40 फीसदी के करीब बढ़कर 12500 करोड़ डॉलर हो सकता है। अब विशेषज्ञों का मानना है कि आयात बिल में राहत मिलेगी।
व्यापार घाटा कम होगा
हमारे देश का आयात-निर्यात में सबसे ज्यादा आयात कच्चे तेल का होता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ता है। उस अनुपात में निर्यात नहीं बढ़ पाते हैं। आयात-निर्यात के इस बड़े अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं। कच्चे तेल की कीमत अब कम होने से हमारा ट्रेड डेफिसिट कम होगा। क्योंकि अक्टूबर 2018 से अब तक कीमत में 35-40 प्रतिशत कमी आ गई है।