कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन जारी है। ऐसे में सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब, किसान और मजदूर हुए हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने इन्हें बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 33 करोड़ से ज्यादा लोगों को 31,235 करोड़ रुपये की सहायता मुहैया कराई गई है।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि 20.05 करोड़ महिलाओं के जनधन खातों में 10,025 करोड़ रुपये डाले जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त वित्त मंत्रालय के अनुसार, 2 करोड़ 82 लाख बुजुर्गों, विधवा और दिव्यांगों के खातों में अब तक 1405 करोड़ रुपये डाल दिए गए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत आठ करोड़ किसानों को 16,146 करोड़ रुपये की पहली किस्त उनके खातों में भेजी जा चुकी है। वहीं सरकार ने 10.6 लाख कर्मचारियों के ईपीएफ खाते में 162 करोड़ रुपये डाले गए हैं।
15 दिनों में धन निकासी के 10.02 लाख दावों का निपटान
श्रम मंत्रालय ने कहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पिछले 15 कार्य दिवस में 10.02 लाख निकासी-दावों का निपटान किया और कुल 3,600.85 करोड़ रुपये वितरित किए। इसमें से 6.06 लाख दावों के आवेदन कोरोना वायरस संकट के तहत ईपीएफ से पैसा निकलने की मिली अनुमति के तहत दिए गए।
जरूरतमंद कामगारों को राहत
उल्लेखनीय है कि ईपीएफओ ने संकट की घड़ी में जरूरतमंद कामगारों को राहत देने के लिए तीन महीने के मूल वेतन (मूल वेतन जमा महंगाई भत्ता) के बराबर की राशि भविष्य निधि से निकालने की अनुमति दी है।
केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस माहमारी में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) की शुरुआत 26 मार्च को की। इसके तहत ईपीएफ योजना से कर्मचारियों को पैसा निकालने की अनुमति देने की घोषणा की गई। इसके लिए तत्काल अधिसूचना जारी की गई। इसमें कर्मचारियों के कोरोना संकट से पार पाने में मदद के लिए अपने भविष्य निधि खाते में तीन महीने का मूल वेतन या ईपीएफ खाते में जमा राशि का 75 फीसदी, जो भी कम हो, निकालने की अनुमति दी गई है।
ईपीएफओ ने उमंग एप के जरिए भविष्य निधि से पैसा निकालने और अन्य सेवाओं के लिए ऑनलाइन सुविधा प्रदान की है।