लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ ने देश के कई हिस्सों में फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब और राजस्थान में फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। वहीं अन्य राज्यों में इसका असर स्थानीय स्तर पर ही है। इसमें कहा गया है कि अगले कुछ हफ्ते कृषि क्षेत्र के लिए बेहद अहम होंगे।
क्रिसिल ने कहा कि सिंतबर का वर्षा पैटर्न महत्वपूर्ण होगा क्योंकि भारतीय मौसम विभाग ने उत्तरी और मध्य भारत में सामान्य से अधिक वर्षा का अनुमान लगाया है। यह धान, कपास, सोयाबीन, मक्का और प्याज के प्रमुख विकास चरणों के साथ मेल खाता है। इससे यह महीना फसलों के स्वास्थ्य और उपज के लिए महत्वपूर्ण है।
2 सितंबर तक, कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत से लगभग सात प्रतिशत अधिक रही। झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। दक्षिण-पश्चिम मानसून, जो भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 76 प्रतिशत है, कृषि और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पंजाब सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक रहा, जहां अगस्त में बारिश सामान्य से 74 प्रतिशत ज्यादा रही। राज्य की 42.4 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से लगभग 70,000 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ में डूब गई। धान, गन्ना और कपास जैसी फसलें कई जिलों में डूब गईं।
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क्रिसिल ने कहा कि अनियमित वर्षा से भी मुद्रास्फीति का खतरा पैदा होता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य पदार्थों का भार 47 प्रतिशत है व ग्रामीण परिवारों के खर्च में इसका हिस्सा 47 प्रतिशत, जबकि शहरी परिवारों के खर्च में 40 प्रतिशत है। उत्पादन में और अधिक कमी से आपूर्ति पक्ष पर दबाव बढ़ सकता है।