रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया काफी अनिश्चित नजर आ रही है। क्रिसिल ने कहा कि इस महामारी की वजह से वैश्विक स्तर पर विमानन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
30 जून तक बढ़ाई गई रुचि पत्र जमा करने की तारीख
घाटे में चल रही राष्ट्रीय एयरलाइन एयर इंडिया को बेचने का एक और प्रयास करते हुए सरकार ने इस साल जनवरी में विमानन कंपनी के लिए रुचि पत्र (ईओआई) मांगे थे। ईओआई जमा कराने की आखिरी तारीख को अब बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया गया है। पहले इसकी समयसीमा 17 मार्च थी, जिसे बढ़ाकर 30 अप्रैल किया गया था।
क्रिसिल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी के निदेशक एवं प्रैक्टिस लीडर (परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स) जगननारायण पद्मनाभन ने कहा कि, 'एक जानी-मानी एयरलाइन एयर इंडिया के लिए बोली लगाने वालों को जैसी प्रतिबद्धता जताने की जरूरत है, मौजूदा माहौल में ऐसा हो पाना अनिश्चित है।'
हो सकता है कंपनियों का विलय
हालांकि, क्रिसिल का मानना है कि मौजूदा स्थिति की वजह से घरेलू विमानन कंपनियों को जो नुकसान होने का अनुमान है उसके चलते एयरलाइन कंपनियों का विलय एवं अधिग्रहण देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, 'बेशक एयर इंडिया के लिए ईओआई जारी किया गया है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कोई एयरलाइंस किसी तरह की नई संपत्ति नहीं जोड़ना चाहेगी।'
पिछले वित्तीय वर्ष हुआ था इतना घाटा
नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि, 'वित्त वर्ष 2018-19 के ऑडिट अकाउंट के अनुसार, एयर इंडिया का समेकित घाटा 62,614 करोड़ रुपये था।' उन्होंने कहा कि ब्याज के अत्यधिक भार, प्रतिस्पर्धा, भारतीय रुपये के कमजोर होने तथा कुछ अन्य कारणों से एयर इंडिया को नुकसान हुआ है। मंत्री ने कहा कि नुकसान के बावजूद एयर इंडिया सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम तेल कंपनियों को भुगतान करती आ रही है।