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पश्चिम एशिया संकट का असर: क्या भारत का घाटा 2% तक पहुंच जाएगा? क्रिसिल की बड़ी चेतावनी; समझिए पूरी तस्वीर

Sun, 12 Apr 2026 04:36 PM IST
Himanshu Singh Chandel एएनआई, नई दिल्ली

सार

पश्चिम एशिया संकट के चलते भारत का चालू खाता घाटा 2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार तेल, गैस और उर्वरक की बढ़ती कीमतों से आयात बिल बढ़ेगा। निर्यात, रेमिटेंस और आर्थिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि सर्विस सेक्टर कुछ राहत दे सकता है।
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क्रिसिल रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो भारत का चालू खाता घाटा यानी CAD बढ़कर 2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसका सीधा असर देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई और विकास दर पर पड़ सकता है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा बढ़ती तेल और गैस की कीमतें हैं। कच्चे तेल की कीमतों में 23 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी से आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है। साथ ही गैस और उर्वरक की लागत भी बढ़ रही है, जिससे व्यापार घाटा और ज्यादा बढ़ने की आशंका है। ऐसे में भारत को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

क्या बढ़ती तेल कीमतें सबसे बड़ा खतरा हैं?
रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोलियम आयात पहले से ही भारत के कुल आयात का बड़ा हिस्सा है। अगर कीमतें और बढ़ती हैं, तो आयात बिल और भारी हो जाएगा। इससे चालू खाता घाटा बढ़ेगा और रुपये पर भी दबाव पड़ेगा। साथ ही महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाएगा।
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क्या निर्यात और विदेशी आय पर भी असर पड़ेगा?
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भारत के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है। शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने से सामान भेजना महंगा हो जाएगा। इसके अलावा वहां काम कर रहे भारतीयों की कमाई पर असर पड़ने से रेमिटेंस यानी विदेश से आने वाला पैसा भी कम हो सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ेगा।

क्या सेवाओं का सेक्टर राहत देगा?
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का मजबूत सर्विस सेक्टर कुछ राहत दे सकता है। आईटी और अन्य सेवाओं से मिलने वाला पैसा घाटे को थोड़ा कम कर सकता है। लेकिन अगर संकट लंबा चला, तो यह राहत भी सीमित रह सकती है।
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क्या भारत की विकास दर पर भी असर पड़ेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, अगर हालात खराब होते हैं तो भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत से घटकर 6.8 प्रतिशत तक आ सकती है। ज्यादा महंगे कच्चे माल और ऊर्जा की कमी से मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। इससे देश की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

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