बीओबी की अर्थशास्त्री सोनल बधान के अनुसार क्रेडिट रेंटिग अपग्रेड किए जाने के बाद भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार और कॉरपोरेट दोनों के लिए उधार लेने की लागत कम होगी।
एसएंडपी द्वारा हाल ही में क्रेडिट रेंटिग अपग्रेड किए जाने के बाद भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह में तेजी आने की संभावना है। बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की अर्थशास्त्री सोनल बधान ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि इससे देश के लिए उधार लेने की लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।
ऋण बाजार को लाभ मिलने की संभावना
बधान ने कहा कि इस अपग्रेड से भारत की ‘मजबूत बुनियाद’ और ‘विकास गति’ पर भरोसा बढ़ा है। इससे विदेशी पूंजी निवेश पर अल्पकाल और दीर्घकाल दोनों में सकारात्मक असर पड़ेगा। इस वर्ष एफपीआई निवेश में वृद्धि और बॉन्ड यील्ड में गिरावट की संभावना है। उन्होंने कहा कि सरकार और कॉरपोरेट दोनों के लिए उधार लेने की लागत कम होगी।
विज्ञापन
आरबीआई के आंकड़े
वित्त वर्ष 2024-25 (जुलाई-सितंबर 2024) की दूसरी तिमाही के लिए आरबीआई के वार्षिक वित्तीय खाता डेटा से संकेत मिलता है कि शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में 2.2 अरब डॉलर की बिकवाली दर्ज हुई। वहीं वित्त वर्ष 2023-24 में इसी तिमाही के दौरान 0.8 अरब डॉलर की बिकवाली दर्ज हुई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में 81.04 अरब डॉलर का अनंतिम एफडीआई प्रवाह दर्ज किया। यह वित्त वर्ष 2023-24 के 71.28 अरब डॉलर से 14 प्रतिशत अधिक है।
सरकार द्वारा उधार लेने की गुंजाइश कम
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि सरकार के पास उधार लेने के लिए अधिक गुंजाइश होगी, लेकिन हमारा मानना है कि सरकार द्वारा इसका उपयोग किए जाने की संभावना कम है। वित्त वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में, केंद्र ने अपने ऋण-जीडीपी अनुपात को धीरे-धीरे नीचे लाने की प्रतिबद्धता जताई थी। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार उधार कार्यक्रम को सीमित रखने का इरादा रखती है। अर्थशास्त्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में केंद्र ने अपने ऋण-जीडीपी अनुपात को धीरे-धीरे नीचे लाने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसका मतलब है कि उधार कार्यक्रम को सीमित रखने का उसका इरादा है।