ओरल हेल्थ मूवमेंट पहल के तहत देश के 700 जिलों और 18,000 से अधिक पिन कोड पर अब तक 45 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें से सिर्फ 10 फीसदी लोगों को ही पांच में से पांच और 24 फीसदी को सबसे कम एक स्कोर मिला है। स्क्रीनिंग के आंकड़े बताते हैं कि 41 फीसदी लोगों में कैविटी होने का खतरा काफी अधिक है।
ओरल हेल्थ पर ध्यान नहीं देने के कारण 90 फीसदी भारतीयों को दांतों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह न सिर्फ कैंसर जैसी बीमारियों की वजह बन रहा है, बल्कि देश को हर साल 7.2 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हो रहा है।
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कोलगेट-पामोलिव (इंडिया) की एमडी एवं सीईओ प्रभा नरसिम्हन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा, ओरल हेल्थ में भारत का स्कोर पांच में से 2.6 है। इसकी प्रमुख वजह ओरल केयर का अभाव है। आलम यह है कि 80 फीसदी शहरी भारतीय रात में ब्रश नहीं करते हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले 55 फीसदी लोग प्रतिदिन एक बार भी ब्रश नहीं करते हैं। यह बड़ी समस्या है, जिसके समाधान के लिए कोलगेट पामोलिव आठ दशक से अधिक समय से भारत में ओरल केयर पर काम कर रही है। कंपनी ओरल हेल्थ को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता के तहत भारत में ओरल हेल्थ मूवमेंट चला रही है।
45 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
प्रभा बताती हैं कि ओरल हेल्थ मूवमेंट पहल के तहत देश के 700 जिलों और 18,000 से अधिक पिन कोड पर अब तक 45 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें से सिर्फ 10 फीसदी लोगों को ही पांच में से पांच और 24 फीसदी को सबसे कम एक स्कोर मिला है। स्क्रीनिंग के आंकड़े बताते हैं कि 41 फीसदी लोगों में कैविटी होने का खतरा काफी अधिक है, जबकि 44 फीसदी लोग मसूड़े की समस्या से जूझ रहे हैं।
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2-2-2 के फॉमूर्ले से जड़ से मिटाएं समस्या
प्रभा बताती हैं कि ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए 2-2-2 का फॉर्मूला अपना सकते हैं। इसका मतलब है कि प्रतिदिन कम-से-कम दो मिनट तक दो बार ब्रश करें। इस पर बमुश्किल दो रुपये खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि लोग मोबाइल फोन की मदद से घर बैठे ओरल हेल्थ की जांच करा सकें, इसके लिए हमने इंडियन डेंटल एसोसिएशन से साझेदारी कर 50,000 डेंटिस्ट का नेटवर्क तैयार किया है।