नोटबंदी, फिर जीएसटी और अब कोविड-19 का कहर; देश का मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्योग लगातार एक के बाद एक कठिन चुनौतियों से जूझ रहा है। कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन होने से इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
औद्योगिक संगठन एसोचैम के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने अमर उजाला से कहा कि अभी उन्हें भी इसका ठीक-ठीक अंदाजा नहीं है कि कोरोना वायरस का कितना असर लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों पर पड़ सकता है ।
लेकिन यह तय है कि पहले ही अनेक फैसलों के कारण मुश्किल दौर से गुजर रहे इस उद्योग क्षेत्र के लिए यह नुकसान इसकी कमर तोड़ देने वाला है साबित हो सकता है। कोरोना की वजह से कितनी नौकरियां खतरे में हैं, इसका अभी आकलन किया जा रहा है।
कोरोना की सबसे पहली और सीधी मार दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ी है। निर्माण क्षेत्र पर पाबंदी लगने से अकेले मुंबई में ही लगभग 25 लाख दिहाड़ी मजदूरों को रोजगार खोना पड़ा है। अगर सरकार इस क्षेत्र को बचाने के लिए ठोस आर्थिक उपायों की जल्द घोषणा नहीं करती है तो देश की अर्थ व्यवस्था पर तीखी चोट पड़ सकती है।
कोरोना के असर को लेकर एसोचैम के शीर्ष अधिकारियों ने केंद्र के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और क्षेत्र की स्थिति की जानकारी दी। संगठन ने सरकार से मांग की है कि इस क्षेत्र को कोरोना के कहर से बचाने के लिए कर्ज वापसी के लिए उसे दो से तीन वर्ष का फ्लेक्सिबल अतिरिक्त समय दिया जाए।
इसके आलावा जीएसटी और इनकम टैक्स देने की समय सीमा को भी लचीला बनाया जाना चाहिए, जिससे तत्काल नुकसान की आशंका को कम किया जा सके।
प्रधानमंत्री ने औद्योगिक निकायों से अपील की है कि वे अपने कर्मचारियों को नौकरी से न निकालें। इतना ही नहीं वे उनके वेतन में कटौती भी न करें। यह मुश्किल समय है और उन्हें सबका साथ देने की जरूरत है।
लेकिन एक औद्योगिक संगठन के शीर्ष पदाधिकारी का कहना है कि अगर कोरोना के कारण बंदी एक या दो महीने तक चलती है, तो वे कुछ इसका कुछ न कुछ नुकसान सह लेंगे। लेकिन विदेश के कई देशों की तरह अगर यह लंबा खिंचता है तो इसका नुकसान बर्दाश्त करना किसी भी उद्योग के लिए संभव नहीं होगा।
इस स्थिति में नुकसान की कल्पना भी भयावह हो सकती है।
औद्योगिक संगठन फिक्की का आकलन है कि चीन की बंदी के कारण इलेक्ट्रोनिक्स, सी फ़ूड, पेट्रोकेमिकल्स और आभूषण उद्योग को सीधा नुक्सान हुआ है। निर्यात में कमी के कारण अकेले मछली पालन उद्योग को 1,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
भारत अपने हीरा उद्योग के कुल उत्पादन का लगभग 36 फीसदी केवल चीन को निर्यात करता है। इसी प्रकार पेट्रो केमिकल्स का लगभग 34 फीसदी उत्पाद चीन को निर्यात किया जाता है।
लेकिन कोरोना के कारण यह निर्यात पूरी तरह से ठप है। अकेले फरवरी से अप्रैल के बीच कैंसिल हुए आर्डर से आठ से दस हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है।
निर्माण, पर्यटन, हस्तशिल्प उत्पाद, कृषि उत्पादों से संबंधित क्षेत्र और केमिकल्स सेक्टर में अभी मंदी और अधिक गहराने के आसार हैं। इसी समय में दवा क्षेत्र, मेडिकल इक्विपमेंट बनाने वाले क्षेत्र और केमिकल मेडिसिनल सेक्टर में कोरोना के कारण कुछ बढ़ोतरी होने की भी उम्मीद है, लेकिन यह बढ़ोतरी पूरे नुकसान की अंश मात्र भी न होने से इसका पूरी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ना तय माना जा रहा है।