कोरोना वायरस महामारी से पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। देशभर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन से पर्यटन उद्योग की कमर टूट गई है। इससे उद्योग से जुड़े 3.8 करोड़ लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। भारत में करोड़ों लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पर्यटन उद्योग से जुड़े हुए हैं।
इस संदर्भ में पर्यटन क्षेत्र के संगठन फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी (फैथ) सरकार को पहले ही अवगत करा चुका है कि पांच खरब रुपये की इस इंडस्ट्री को नुकसान से बचाने के लिए प्रयास किए जाने की जरूरत है। लॉकडाउन से पहले ही कई एयरलाइंस व ट्रेवल कंपनियों ने अपने 35 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों को बिना सैलरी के छुट्टी पर भेज दिया था।
मालूम हो कि उद्योग संघ के अनुसार, यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र का 2018 में भारत की जीडीपी में 9.2 फीसदी योगदान था और इसने 2.67 करोड़ रोजगार दिए।
एसोचैम के अनुसार, वैश्विक महामारी के रूप में फैले इस कोरोना वायरस का सबसे अधिक असर होटल, टूर एंड ट्रेवल, विमानन, खानपान, निर्माण और मनोरंजन क्षेत्र पर पड़ेगा। हवाई अड्डों की पार्किंग में लगी कतारों में इन्हें खड़ा रखना और इनकी मरम्मत करना कंपनियों के लिए चुनौती है। विमान के रखरखाव में कंपनी को मोटी रकम खर्च करनी होती है।
सरकार से मांगी राहत
कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के लिए एक प्रमुख उद्योग संघ ने सरकार से कर्ज अदायगी में छह महीने की राहत, जीएसटी में एक साल की छूट और इस क्षेत्र के लिए विशेष कोष बनाने की मांग की है।
बुकिंग में 18-20 फीसदी की कमी, किराया 12-14 फीसदी घटा
भारतीय वाणिज्य परिसंघ (आईसीसी) ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित ज्यादातर पर्यटन कंपनियों को सरकार से कम से कम छह महीने के लिए ईएमआई, कर और कर्मचारियों के वेतन में अंतरिम राहत की दरकार है। आईसीसी के महानिदेशक राजीव सिंह ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के चलते 2020 में पूरे साल के लिए बुकिंग में 18-20 फीसदी की कमी आई है, जबकि औसत दैनिक किराया 12-14 फीसदी तक घट गया है।’’
उद्योग संघ ने केंद्र सरकार से कई तरह की राहत मांगी है, जिसमें आरबीआई द्वारा तीन महीने तक कर्ज अदायगी के प्रस्ताव को छह महीने तक बढ़ाने और पर्यटन, यात्रा तथा आतिथ्य क्षेत्र के लिए एक साल तक जीएसटी में पूरी तरह छूट शामिल है। आईसीसी ने एक बयान में कहा, ‘‘आईसीसी ने एक यात्रा एवं पर्यटन स्थिरता कोष बनाने का सुझाव दिया है, जो वित्तीय नुकसान और रोजगार में कटौती रोकने के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरित करे।’’
दुनियाभर में टूरिज्म इंडस्ट्री को हो रहा नुकसान
ना सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया के कई शहरों में लॉकडाउन किया गया है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान पर्यटन उद्योग को हो रहा है। विश्व ट्रेवल एंड टूरिज्म काउंसिल (WTTC) के अनुसार, पर्यटन उद्योग में पांच करोड़ लोगों का रोजगार खत्म हो सकता है। 2020 में पर्यटन से जुड़ी 25 फीसदी बुकिंग्स रद्द की जा चुकी हैं। ऐसे में टूरिज्म इंडस्ट्री को खासा नुकसान हो रहा है।
उद्योग को उबरने में लग सकता है एक साल
डब्ल्यूटीटीसी के अध्ययन के अनुसार, पर्यटन उद्योग को जो नुकसान होगा, उससे उबरने में करीब 10 से 12 महीने लग जाएंगे। क्योंकि लोगों के मन में डर बैठ गया है और वे विदेश जाने से बचेंगे।
सभी राज्य प्रभावित
देश में हिमाचल प्रदेश, केरल, आगरा और पश्चिम बंगाल सहित हर राज्य में पर्यटन प्रभावित हुआ है। हिमाचल प्रदेश के पसंदीदा रिसॉर्ट्स की बुकिंग में भारी गिरावट आई चुकी है। केरल का पर्यटन उद्योग 2020 में और अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने की तैयारी कर रहा था। लेकिन यहां भी बड़ी संख्या में पर्यटकों ने अपनी बुकिंग रद्द करा दी। आगरा में 31 मार्च तक चलने वाला टूरिस्ट सीजन 16 मार्च को ही समाप्त हो गया। ताजमहल की ओर जा रहे रास्तों पर सन्नाटा पसरा है। उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग व तराई का क्षेत्र कोरोना वायरस महामारी के चलते पूरे देश में लागू किए गए लॉकडाउन से काफी प्रभावित हो रहा है।