फरवरी 2020 में भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी गतिविधियों की रफ्तार सुस्त रही। हालांकि, फिर भी कुल-मिलाकर परिस्थितियां मजबूत बनी हुई हैं। इस संदर्भ में सोमवार को एक मासिक सर्वेक्षण जारी किया गया, जिसके अनुसार, आईएचएस मार्किट इंडिया के विनिर्माण क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) फरवरी 2020 में 54.5 पर रहा।
लगातार 31वें महीने PMI 50 अंक के स्तर से ऊपर
यह आंकड़ा जनवरी 2020 के 55.3 अंक के मुकाबले नीचे है। बता दें कि जनवरी में यह पिछले आठ साल में सबसे ज्यादा था। यह लगातार 31वां महीना है जब भारत में विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई 50 अंक के स्तर से ऊपर बना हुआ है। पीएमआई की गणना 50 अंक से ऊपर रहना क्षेत्र में विस्तार को बताता है जबकि 50 से नीचे रहना गिरावट को दर्शाता है।
फरवरी में 54.5 अंक पर रहा पीएमआई
फरवरी में यह आंकड़ा 54.5 अंक पर रहा, जो कि क्षेत्र में विस्तार जारी रहना बताता है। हालांकि, यह विस्तार जनवरी के मुकाबले कुछ सुस्त रहा है। इस संदर्भ में आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री पालियाना डि लीमा ने कहा कि, 'भारत में कारखानों में फरवरी के दौरान बेहतर आर्डर मिलने की वजह से गतिविधियां बेहतर रहीं। कारखानों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों से आर्डर प्राप्त हुए। मांग में आ रहे इस सुधार से यह तात्पर्य लगाया जा सकता है कि कारखानों में उत्पादन बढ़ेगा और कच्चे माल की खरीदारी भी एतिहासिक रूप से काफी ऊंची दर से होगी।'
भारतीय माल उत्पादकों के समक्ष बड़ी चुनौती
आगे लीमा ने कहा कि, 'कोविड - 19 के फैलने से भारतीय माल उत्पादकों के समक्ष बड़ी चुनौती भी खड़ी हो रही है। दुनिया के कई देशों में इस वायरस के प्रभाव की वजह से निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि कारोबारी आने वाले दिनों में उत्पादन बढ़ने को लेकर ज्यादा आश्वस्त नहीं है और यही वजह है कि वह नई भर्तियों में सतर्कता बरत रहे हैं।' कोरोना वायरस के फैलने से दुनिया की दुसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को पूरी तरह से ठप कर दिया है और इसका असर तमाम उद्योगों पर देखा जा रहा है।