वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार एमपीसी में लिए गए फैसलों का एलान किया। इसके बाद, गवर्नर मल्होत्रा ने आने वाले समय में आरबीआई की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है।
संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के एलान के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, "ऐसी स्थिति (टैरिफ) को देखते हुए वृद्धि दर को समर्थन देने के लिए जो भी करना आवश्यक होगा, हम करते रहेंगे। बेशक, व्यापार वार्ता अब भी जारी है। हमें उम्मीद है कि हम एक सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंच जाएंगे।"
भारत ने हाल ही में ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ एक व्यापक व्यापार समझौता किया है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूजीलैंड सहित कई देशों के साथ इसी तरह के समझौतों पर बातचीत चल रही है।
मल्होत्रा ने यह भी कहा कि भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 11 महीने के आयात का प्रबंध कर सकता है। उन्होंने कहा कि आरबीआई नीति-दर-नीति आधार पर व्यापक आर्थिक स्थितियों की निगरानी करता रहता है और इस आधार पर उचित कदम उठाता है।
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उन्होंने कहा, "हमारे देश के विकास के लिए महंगाई स्थिर रखने और आर्थिक विकास का सही संतुलन प्रदान करने के लिए जो भी जरूरी होगा, उसमें हम पीछे नहीं रहेंगे।" वास्तविक अर्थव्यवस्था पर ब्याज दरों में कटौती के प्रभाव के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसमें देरी होती है। बैंकों की खराब ऋण की स्थिति के संबंध में गवर्नर ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में एनपीए की स्थिति संतोषजनक है, सकल एनपीए 2.2 प्रतिशत है जबकि शुद्ध एनपीए 0.5-0.6 प्रतिशत है।
आरबीआई ने सह-ऋण व्यवस्था पर संशोधित निर्देश जारी किए
भारतीय रिजर्व बैंक ने सह-ऋण व्यवस्था (सीएलए) से जुड़ी संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य ऐसे समझौतों की वैधता को लेकर नियामकीय स्पष्टता प्रदान करना है, साथ ही इससे जुड़े कुछ सावधानीपूर्वक और आचरण संबंधी पहलुओं को भी संबोधित करना है।