वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा डीजीटीआर ने घरेलू इस्पात उत्पादकों को आयात में वृद्धि से बचाने के उद्देश्य से कुछ इस्पात उत्पादों पर 200 दिन के लिए 12 प्रतिशत का अनंतिम सुरक्षा शुल्क लगाने की सिफारिश की है। आइए इस खबर के बारे में विस्तार से जानते हैं।
वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा डीजीटीआर ने घरेलू इस्पात उत्पादकों को आयात में वृद्धि से बचाने के उद्देश्य से कुछ इस्पात उत्पादों पर 200 दिन के लिए 12 प्रतिशत का अनंतिम सुरक्षा शुल्क लगाने की सिफारिश की है।
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पिछले साल दिसंबर में व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने फैब्रिकेशन, पाइप निर्माण, निर्माण, पूंजीगत सामान, ऑटो, ट्रैक्टर, साइकिल और इलेक्ट्रिकल पैनल सहित विभिन्न उद्योगों में उपयोग किए जाने वाले 'गैर-मिश्र धातु और मिश्र धातु स्टील फ्लैट उत्पादों' के आयात में अचानक वृद्धि की जांच शुरू की थी। भारतीय इस्पात संघ की शिकायत के बाद यह जांच की गई।
निदेशालय ने अपनी जांच में प्रारंभिक रूप से पाया है कि भारत में इन उत्पादों के आयात में हाल ही में अचानक, तीव्र और महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जिससे घरेलू उद्योग/उत्पादकों को गंभीर क्षति पहुंचने का खतरा है।
निदेशालय ने 18 मार्च को जारी अधिसूचना में कहा है कि ऐसी गंभीर परिस्थितियां मौजूद हैं, जहां अनंतिम सुरक्षा उपायों के लिए आवेदन में किसी भी प्रकार की देरी से ऐसी क्षति होगी, जिसकी मरम्मत करना कठिन होगा। अनंतिम सुरक्षा उपायों को तत्काल लागू करने की आवश्यकता है।
डीजीटीआर ने एक अधिसूचना में कहा है, "प्राधिकरण विचाराधीन उत्पाद के आयात पर अंतिम निर्धारण होने तक 200 दिनों के लिए 12 प्रतिशत की दर से अनंतिम सुरक्षा शुल्क लगाने की सिफारिश करता है।" शुल्क लगाने का अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय लेगा।