कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की तरफ से कोयले का दाम बढ़ा देने से बिजली की लागत में 9-10 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हो सकती है। यह संभावना आईसीएआर (इकरा) ने जाहिर की है। कोल इंडिया ने गत 30 मई से गैर कोकिंग कोयले के सभी ग्रेड की कीमतों में बढ़ोतरी की है। कीमत बढ़ोतरी को लेकर कोल इंडिया की अधिसूचना के मुताबिक बिजली प्लांट को दिए जाने वाले कोयले के दाम में 15-18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
इकरा का अनुमान है कि कोयले के दाम में इतनी बढ़ोतरी से बिजली उत्पादन की लागत में प्रति यूनिट 9-10 पैसे की बढ़ोतरी होगी। इकरा रेटिंग के वाइस प्रेसिडेंट सब्यसाची मजूमदार के मुताबिक कोयले के दाम बढ़ने से बिजली वितरण कंपनियो (डिस्कॉम) को पहले के मुकाबले अधिक दाम में बिजली की खरीदारी करनी होगी।
उन्होंने बताया कि खुली बोली के तहत होने वाले बिजली खरीद करार (पीपीए) के प्रावधान के मुताबिक फ्यूल की लागत में होने वाली बढ़ोतरी को उत्पादन कंपनियां डिस्कॉम पर डाल सकती है। ऐसे में कोल इंडिया द्वारा की गई इस बढ़ोतरी से डिस्कॉम को पहले के मुकाबले लगभग 6 पैसे प्रति यूनिट अधिक दर से बिजली की खरीदारी करनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि देश का औसत एग्रीगेट ट्रांसमिशन एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) लॉस 25 फीसदी मानने पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली की दरों में 1.4 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि बिजली क्षेत्र के अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक विभिन्न प्रयासों की वजह से बिजली उत्पादन की लागत पहले ही कम हो चुकी है, ऐसे में कोल इंडिया द्वारा कोयले के दाम में बढ़ोतरी का असर नहीं होगा।