नया रोजगार तलाशने में दिक्कत
अप्रैल और मई में 227 लाख लोगों की नौकरी छूटी। व्यास के अनुसार, जिन लोगों की नौकरी गई है, उन्हें नया रोजगार तलाशने में दिक्कत हो रही है। असंगठित क्षेत्र में रोजगार तेजी से सृजित होते हैं, लेकिन संगठित क्षेत्र में अच्छी नौकरियों के आने में समय लगता है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल मई में कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी दर 23.5 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर तक चली गई थी।
स्थिति ठीक होने में लगेगा समय
कई विशेषज्ञों की राय है कि संक्रमण की दूसरी लहर चरम पर पहुंच चुकी है और अब राज्य धीरे-धीरे पाबंदियों में ढील देते हुए आर्थिक गतिविधियों की अनुमति देना शुरू करेंगे। व्यास ने आगे कहा कि तीन से चार फीसदी बेरोजगारी दर को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सामान्य माना जाना चाहिए। यह बताता है कि स्थिति ठीक होने में समय लग सकता है।
केवल तीन फीसदी परिवारों की बढ़ी आय
उन्होंने कहा कि सीएमआई ने अप्रैल में 1.75 लाख परिवार का देशव्यापी सर्वे का काम पूरा किया। इससे पिछले एक साल के दौरान आय सृजन को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। व्यास के अनुसार सर्वे में शामिल परिवार में से केवल तीन फीसदी ने आय बढ़ने की बात कही, जबकि 55 फीसदी ने कहा कि उनकी आमदनी कम हुई है। सर्वे में 42 फीसदी ने कहा कि उनकी आय पिछले साल के बराबर बनी हुई है। उन्होंने कहा, अगर महंगाई दर को समायोजित किया जाए, हमारा अनुमान है कि देश में 97 फीसदी परिवार की आय महामारी के दौरान कम हुई है।