चीन ने अपने देश में वित्तीय प्रणाली को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच बड़े लेन-देन को नियंत्रण रखने के लिए एक व्यवस्था की शुरुआत की है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने नई व्यवस्था के तहत एलान किया है कि खुदरा या बिजनेस क्लाइंट्स को किसी भी तरह की निकासी या जमा पर पहले से विस्तृत जानकारी देनी होगी।
ये व्यवस्था फिलहाल दो साल के लिए शुरू की गई है और इसका विस्तार झेजियांग और शेन्जेन में भी किया जाएगा। चीन के इस फैसले से करीब सात करोड़ लोगों पर असर पड़ेगा। ऐसा माना जा रहा है कि कोरोनावायरस महामारी की वजह से बैंकों के फंसे हुआ कर्ज बढ़ने की वजह से पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने यह कदम उठाया है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि इस साल चीन की आर्थिक वृद्धि पिछला चार दशकों में सबसे धीमी रह सकती है। ऐसे में चीन के बैंकों में फंसे हुए कर्ज में तेज वृद्धि हो रही है। हुबेई और शानक्सी में स्थित दो स्थानीय बैंकों से जब ग्राहक बड़े पैमाने पर निकासी कर रहे थे, तो उसे रोकने के लिए अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
चीन ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि व्यवस्थागत जोखिम को काबू करने के लिए इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत किसी कारोबारियों को पांच लाख युआन यानि कि 53,26,100 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर जानकारी देनी होगी।
इसके अलावा आम लोगों को एक लाख युआन से तीन लाख युआन यानि कि दस लाख से लेकर 30 लाख तक की ट्रांसजैक्शन पर जानकारी देनी होगी। हालांकि इस बयान में यह नहीं कहा गया है कि इस तय राशि से ज्यादा राशि होने पर क्या उसे खारिज कर दिया जाएगा।