सार
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में कई सकारात्मक पहलू दिख रहे हैं, जो अमेरिका के टैरिफ के असर को सीमित कर सकते हैं। उन्होंने जीएसटी सुधार, कर कटौती, रोजगार प्रोत्साहन योजनाओं और घरेलू मांग को मजबूती का कारक बताया। नागेश्वरन ने कहा कि जीडीपी की मजबूत वृद्धि, ग्रामीण आय और डिजिटल भुगतान का बढ़ना भी अर्थव्यवस्था को सहारा देगा।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन।
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भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था में कई सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं, जो अमेरिका के टैरिफ से पड़ने वाले असर को संतुलित कर सकते हैं। उनका कहना है कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम, जैसे प्रत्यक्ष करों में कटौती, जीएसटी सुधार और रोजगार आधारित प्रोत्साहन योजनाएं, आर्थिक मजबूती को सहारा दे रही हैं।
नागेश्वरन ने कहा कि केंद्र सरकार ने कारोबार में सुगमता और ईमानदारी से व्यवसाय करने जैसे संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया है। इससे टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता कम होगी। उन्होंने बताया कि अगस्त महीने के आंकड़े भी अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन की ओर इशारा करते हैं। उनका मानना है कि भले ही अमेरिका के टैरिफ का असर बाहरी मांग और घरेलू उत्पादन पर कुछ हद तक पड़ेगा, लेकिन यह अस्थायी और सीमित होगा।
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मजबूत जीडीपी का योगदान
सीईए ने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही (वित्त वर्ष 2025-26) में भारत की वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी है, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 6.5 प्रतिशत की तुलना में ज्यादा है। वहीं, नाममात्र जीडीपी 8.8 प्रतिशत रही। इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ सरकारी खपत का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी घरेलू मांग के सहारे अर्थव्यवस्था स्थिर रह सकती है।
रोजगार और घरेलू मांग पर असर
नागेश्वरन ने माना कि अमेरिका के टैरिफ से निर्यात आधारित इकाइयों में कुछ नौकरियों पर असर पड़ सकता है, लेकिन यह बड़े पैमाने पर नहीं होगा। कई इकाइयां वैकल्पिक बाजार तलाश सकती हैं। वहीं, अच्छी मानसून और ग्रामीण आय में वृद्धि से घरेलू मांग बढ़ेगी। बजट में दिए गए कर राहत उपायों से परिवारों के हाथ में अधिक पैसा आएगा, जिससे खपत बढ़ेगी और यह अमेरिका से मांग घटने की भरपाई करेगा।
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जीएसटी सुधार और डिजिटल भुगतान में बढ़ोतरी
सीईए ने कहा कि आगामी जीएसटी सुधार भी अर्थव्यवस्था को गति देंगे। उन्होंने माना कि दरों में कमी से राजस्व पर असर हो सकता है, लेकिन बढ़ी हुई खपत से यह संतुलित होगा। एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल लेन-देन में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जो उपभोक्ता खर्च में मजबूती दिखाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से घोषणा की थी कि दिवाली तक नए जीएसटी सुधार लागू होंगे। यह विषय 3-4 सितंबर को दिल्ली में होने वाली जीएसटी परिषद बैठक में चर्चा के लिए रखा गया है।