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Special Kharif Plan: अल नीनो के खतरे के बीच 315 जिलों के लिए केंद्र की विशेष खरीफ योजना, जानिए इस बारे में

Tue, 23 Jun 2026 08:35 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अल नीनो के खतरे और कमजोर मानसून की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने 315 संवेदनशील जिलों के लिए विशेष खरीफ योजना शुरू की है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और किसानों को राहत देने के लिए कई उपायों की घोषणा की।
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने अल नीनो के संभावित खतरे को देखते हुए एक विशेष आकस्मिक योजना शुरू की है। यह योजना देश के 315 संवेदनशील जिलों में खरीफ फसलों को बचाने पर केंद्रित है। इस साल कमजोर मानसून की आशंका है, जिससे कृषि पर बुरा असर पड़ सकता है। कृषि व किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 जून को इस संबंध में एक उच्च स्तरीय आभासी बैठक की अध्यक्षता की।

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बैठक के बाद चौहान ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल काफी देरी से आया है। अब तक सामान्य से करीब 43 फीसदी कम बारिश हुई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 2 जुलाई तक भी बारिश कमजोर रहने की संभावना है। इससे विशेषकर वर्षा आधारित क्षेत्रों में खरीफ फसलें सीधे प्रभावित होंगी। सरकार ने 315 जिलों की पहचान की है जो कमजोर मानसून से प्रभावित हो सकते हैं। इनमें 111 उच्च प्राथमिकता वाले जिले हैं जहां सिंचाई कवरेज 25 फीसदी से कम है।

कमजोर मानसून से निपटने की क्या है तैयारी?

आईसीएआर और आईसीएआर-सीआरआईडीए ने सभी जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजनाएं बनाई हैं। इन योजनाओं में जिले की विशिष्ट जलवायु परिस्थितियां, फसल पैटर्न और जल संसाधनों को ध्यान में रखा गया है। कम बारिश की स्थिति में उपयुक्त वैकल्पिक फसलों का सुझाव दिया गया है। फसल विविधीकरण और उपलब्ध जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर है। अतिरिक्त आय के अवसर भी सुझाए गए हैं ताकि जोखिम कम हो सके। जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

जल और फसल प्रबंधन के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

तालाबों, जलाशयों, चेक बांधों और अस्थायी तटबंधों की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्य मनरेगा और वीबी-ग्रामग योजनाओं के तहत तुरंत किया जाएगा। संवेदनशील जिलों को पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर अधिशेष क्षेत्रों से कमी वाले क्षेत्रों में पानी स्थानांतरित किया जाएगा। राज्यों को कम पानी में अधिक उपज देने वाली कम अवधि की फसल किस्मों को बढ़ावा देने को कहा गया है। दालों, श्री अन्न (बाजरा) और तिलहन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

किसानों को सहायता और सलाह कैसे मिलेगी?

खरीफ मौसम के लिए पर्याप्त बीज और उर्वरक की व्यवस्था की गई है। संभावित प्रभावित जिलों के लिए अतिरिक्त बीज भंडार आरक्षित किए गए हैं। देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को वैज्ञानिक सलाह देंगे। ये केंद्र एसएमएस, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर और सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देंगे। कमजोर मानसून से चारे की कमी हो सकती है, जिसके लिए अग्रिम आपूर्ति योजनाएं बन रही हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कवरेज बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने में तेजी लाने को कहा गया है।

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