देश में आने वाले महीनों में बिजली की मांग बढ़ने की उम्मीद के बीच केंद्र सरकार ने 112 कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध अधिकतम क्षमता पर चलाने का निर्देश दिया है। ये निर्देश 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेंगे। सरकार का मकसद बिजली उत्पादन की उपलब्ध क्षमता का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर ग्रिड में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।
विद्युत मंत्रालय ने 25 सितंबर को जारी आदेश में 50 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता के अधिकतम स्तर पर बिजली उत्पादन करने को कहा है। यह निर्देश बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 11 के तहत जारी किया गया है।
विद्युत मंत्रालय के मुताबिक मौजूदा समय में बिजली की मांग और आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में सरकार बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है।
मंत्रालय का कहना है कि बिजली उत्पादन के सभी स्रोतों की उपलब्ध क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करना जरूरी है। कैप्टिव प्लांट भी इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
कैप्टिव प्लांटों को अपनी औद्योगिक जरूरत पूरी करने के बाद बची हुई बिजली को पावर एक्सचेंजों के जरिए बेचने के लिए उपलब्ध कराना होगा। यह बिक्री लागू बाजार नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार होगी।
विद्युत मंत्रालय के आदेश के साथ जारी सूची में 112 कैप्टिव जनरेशन इकाइयां शामिल हैं। इनमें देश के कई बड़े औद्योगिक समूहों और कंपनियों से जुड़े बिजली संयंत्र हैं। सूची में टाटा स्टील, वेदांता, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, JSW स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और NALCO जैसी कंपनियों की इकाइयां शामिल हैं।
इन प्लांटों का संबंध स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, पेट्रोलियम, उर्वरक, पेपर और केमिकल जैसे कई प्रमुख उद्योगों से है।
हां। सरकार ने इन बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयला स्टॉक बनाए रखने का भी निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित न हो और अक्टूबर से दिसंबर के दौरान प्लांट अपनी अधिकतम उपलब्ध क्षमता पर काम कर सकें।
इन कंपनियों को हर सप्ताह केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट में बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंज या अन्य अनुमत माध्यमों से बेची गई बिजली, उपलब्ध उत्पादन क्षमता और कोयला स्टॉक की जानकारी देनी होगी।
सरकार के इस कदम से अगले तीन महीनों में कैप्टिव बिजली उत्पादन की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अपनी जरूरत से अतिरिक्त बिजली बाजार में आने पर ग्रिड में उपलब्ध बिजली की मात्रा बढ़ सकती है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव बिजली की मांग, प्लांटों की उपलब्ध क्षमता और कोयले की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
सरकार ने बढ़ती बिजली मांग की संभावित चुनौती से निपटने के लिए कैप्टिव कोयला बिजली संयंत्रों की क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करने का फैसला किया है। 1 अक्तूबर से 31 दिसंबर तक 112 प्लांटों पर लागू यह आदेश उत्पादन, कोयला स्टॉक और अतिरिक्त बिजली की बिक्री- तीनों पर निगरानी बढ़ाएगा।