केंद्र सरकार 20,000 करोड़ रुपये के फंड को इकट्ठा करने के लिए कोल इंडिया और आईडीबीआई बैंक में अपना हिस्सा बेचने पर विचार कर रही है। देश की अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए केंद्र सरकार आर्थिक प्रोत्साहन ला सकती है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी बिक्री पर जोर देगी जो जो बाजार की धारणा पर टिका है।
कोल इंडिया के मामले में अगर मूल्यांकन आकर्षित नहीं हुए तो कंपनी सरकार से शेयर बायबैक करेगी। कोविड-19 महामारी की वजह प्रधानमंत्री मोदी के बजट लक्ष्यों पर रोक लग गई है। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होने से सरकार पर कल्याण कारी योजनाएं चलाने का भार है। इसके लिए एक प्रोत्साहन पैकेज की काफी जरूरत महसूस हो रही है।
इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री मोदी ने 2.1 लाख करोड़ पैकेज की उल्लेखना की थी, ताकि जीडीपी के 3.5 फीसदी वित्तीय घाटा पर नियंत्रण किया जा सके। लेकिन कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। भारत रूस को पछाड़कर दुनिया में तीसरे नंबर पर आ गया है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध और तेल की कीमतों में कमी होने से एयर इंडिया और रिफाइनरी कंपनी भारत पेट्रोलियम की बिक्री पर कपड़ा डाल दिया है। भारत की संपत्ति बिक्री का लक्ष्य वित्तीय वर्ष के अंत तक यानि कि 31 मार्च तक पिछले साल की तुलना में दोगुना हो गया है।
पिछले साल भारतीय जीवन बीमा निगम ने आईडीबीआई बैंक से 51 फीसदी निरोधक हिस्सा वापस ले लिया था, जिसके बाद बैंक में सरकार का हिस्सा 47 फीसदी ही रहा। कोल इंडिया लिमिटेड में केंद्र सरकार 66 फीसदी हिस्सा होल्ड करती है। जनवरी 2015 में सरकार ने 10 फीसदी हिस्से को बेच दिया था।