मीडिया स्वामित्व का केंद्रीयकरण लोकतंत्र और दूरसंचार के लिए खतरा साबित हो सकता है और प्रसारण नियामक ट्राई इससे संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए सिफारिशों पर काम कर रहा है। ये बातें भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन पीडी वाघेला ने उद्योग मंडल सीआईआई के कार्यक्रम ‘बिग पिक्चर समिट' में यह कही है। वाघेला ने कहा है कि नियामक निकाय के विशेषज्ञ 'ओवर-द-टॉप' सेवाओं से जुड़े मुद्दों की स्टडी कर रहे हैं और इस मामले में सुरक्षात्मक मसौदा तैयार किया जाएगा।
वाघेला के अनुसार, ‘मीडिया स्वामित्व के केंद्रीयकरण से कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस बात में कोई शक नहीं है कि सबसे महत्वपूर्ण खतरा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए है। हम मीडिया स्वामित्व से जुड़े मुद्दों पर सिफारिशें तैयार कर रहे हैं।’
ट्राई ने डिजिटल प्रौद्योगिकी के आने के साथ क्षेत्र में हो रहे भारी बदलाव के मद्देनजर अप्रैल 2022 में अंतर मीडिया स्वामित्व और नियंत्रण, प्रणाली और संबंधित मुद्दों की निगरानी की जरूरत पर एक परामर्श पत्र जारी किया था।
नियामक ने 2014 में मीडिया स्वामित्व पर भी सिफारिशें जारी की थीं, लेकिन सरकार ने अभी तक इन्हें स्वीकार नहीं किया है। दूरसंचार क्षेत्र की नियामक संस्था ट्राई ने वर्ष 2014 में राजनीतिक दलों को प्रसारण क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने का सुझाव दिया था, जबकि इस संबंध में कॉरपोरेट घरानों पर कई प्रतिबंधों की भी सिफारिश की की गई थी।