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100 दिन का परिवर्तन एजेंडा: एफडीआई व्यवस्था को उदार बनाएगी केंद्र सरकार, विदेशी निवेश होगा और आसान

Tue, 19 Aug 2025 04:30 AM IST
शुभम कुमार बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय 100 दिन के सुधार एजेंडे पर काम कर रहा है, जिसमें एफडीआई नियमों में ढील, स्टार्टअप्स को टैक्स में राहत, चमड़ा उद्योग के पर्यावरण मानकों में छूट, और निर्यात बढ़ाने के लिए ई-कॉमर्स हब की स्थापना शामिल है। मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह पहल भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अहम कदम है।

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल - फोटो : ANI
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विस्तार
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय एक 100 दिवसीय सुधार एजेंडे पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) व्यवस्था में ढील देना और पड़ोसी देशों से निवेश को आसान बनाना है। इस सुधार एजेंडे में स्टार्टअप के लिए कर लाभ और अधिक बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि चमड़ा और जूता उद्योग के लिए पर्यावरणीय मानदंडों में कुछ ढील देने, निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से ई-कॉमर्स केंद्रों की स्थापना में तेजी लाने, भारत ट्रेडनेट के जरिये ट्रैकिंग में तेजी लाने और एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रयोगशाला परीक्षण और प्रमाणन की सुविधा मुहैया कराने का भी प्रस्ताव है।

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एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ऐसे कदम भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी उच्च टैरिफ के बीच भारत के लिए निर्यात बढ़ाने में मददगार साबित होंगे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सरकार 100 दिनों के परिवर्तन एजेंडे पर काम कर रही है।

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इसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से स्वतंत्रता दिवस पर किए गए वादों को पूरा करने पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने से नहीं रोक सकती। भारत दुनिया के सबसे पसंदीदा उपभोक्ता बाजार और शीर्ष निवेश स्थल के रूप में उभर रहा है।
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अभी पड़ोसी देशों से एफडीआई के लिए अनुमोदन जरूरी
जुलाई 2024 में बजट-पूर्व आर्थिक सर्वेक्षण में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात बाजार के दोहन के लिए चीन से एफडीआई बढ़ाने पर जोर दिया गया था।  अभी भारत में अधिकांश एफडीआई स्वचालित अनुमोदन के तहत आता है। हालांकि, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले एफडीआई के लिए किसी भी क्षेत्र में अनिवार्य सरकारी अनुमोदन की आवश्यकता होती है। भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान,  नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान हैं। रक्षा, मीडिया और फार्मास्यूटिकल्स  जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी अनुमोदन आवश्यक है। हालांकि, कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी निवेश पर भी प्रतिबंध है।

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