भारत की आर्थिक वृद्धि तभी सार्थक बदलाव में बदल सकती है, जब इसका लाभ श्रमिकों और कंपनियों के बीच निष्पक्ष रूप से साझा हो। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने यह बात कही। उन्होंने जोर दिया कि निष्पक्षता कोई दान नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और टिकाऊ बाजार अर्थव्यवस्था की शर्त है। नागेश्वरन ने एआईएमए कार्यक्रम में अपने मुख्य भाषण में यह बात कही।
उन्होंने तर्क दिया कि निष्पक्षता पर बहस को श्रमिकों और कारोबारों के बीच चुनाव के रूप में नहीं देखना चाहिए। पूंजी को उचित प्रतिफल का अधिकार है, जबकि श्रमिकों को अपने काम से उत्पन्न समृद्धि में सार्थक हिस्सा मिलना चाहिए। एक टिकाऊ बाजार अंततः उपभोक्ताओं पर निर्भर करता है। उपभोक्ताओं के पास कारोबारों द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने के लिए पर्याप्त क्रय शक्ति होनी चाहिए। एक स्वस्थ बाजार को ऐसे ग्राहकों की आवश्यकता होती है, जो खरीद सकें। ये ग्राहक अंततः किसी के श्रमिक ही होते हैं।
नागेश्वरन ने कहा कि पूंजी उचित प्रतिफल की हकदार है। इसे कमाने का एक ईमानदार तरीका है और एक आत्म-पराजय वाला तरीका भी है। यदि हम मजदूरी कम करते हैं, आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान में देरी करते हैं और अंतर को लाभ के रूप में रखते हैं, तो यह आत्म-पराजय बन जाता है। यह तब तक काम करता है, जब तक ग्राहकों की बचत खत्म नहीं हो जाती। ईमानदार तरीका वास्तविक लागत को कम करना है।
सरकार की क्या भूमिका है?
नागेश्वरन ने कहा कि सरकार को सस्ती बिजली और किफायती भूमि सुनिश्चित करनी चाहिए। उसे अनुपालन बोझ भी कम करना चाहिए। इससे कारोबार करने की लागत कम होगी। कारोबार करने की लागत कम करना सरकारों के लिए रोजगार सृजित करने का मुख्य आधार है। सरकारें स्वयं स्थायी रोजगार सृजित नहीं करती हैं। वे आर्थिक गतिविधि को आसान बनाती हैं। कारोबारों द्वारा की गई यही गतिविधि रोजगार पैदा करती है।
वृद्धि को बदलाव में कैसे बदलें?
सीईए ने जोर दिया कि भारत की आर्थिक चुनौती अब केवल तेजी से वृद्धि करना नहीं है। बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वृद्धि से आम भारतीयों के लिए बेहतर रोजगार, अधिक मजदूरी और अधिक आर्थिक सुरक्षा मिले। उन्होंने कहा कि देश को अब वृद्धि को "बदलाव" में बदलने पर ध्यान देना चाहिए। भारत की वृद्धि का अनुमान अब स्थिर हो गया है। सतर्क अनुमान भी मध्यम अवधि की वार्षिक वृद्धि करीब 6.5-7 फीसदी बताते हैं। पश्चिम एशिया संकट की चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।
निष्पक्षता क्यों महत्वपूर्ण है?
नागेश्वरन ने बताया कि वृद्धि मापती है कि अर्थव्यवस्था हर साल कितनी बड़ी होती है। बदलाव इस वृद्धि के चरित्र के बारे में है, जैसे किसे लाभ होता है। यह देखता है कि कितने श्रमिक असुरक्षित रोजगार से उत्पादक और स्थिर रोजगार में जाते हैं। साथ ही, क्या परिवारों के जीवन स्तर में वास्तव में सुधार होता है। सीईए ने कहा कि वृद्धि तभी बदलाव बनती है, जब वह निष्पक्ष हो। उन्होंने निष्पक्षता को केवल नैतिक सिद्धांत नहीं, बल्कि सामान्य लेखा अर्थ में समझने पर जोर दिया।