21 अक्तूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स) घटकर जुलाई, 2020 के बाद दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, 28 अक्तूबर वाले सप्ताह में यह बढ़कर 531 अरब डॉलर पहुंच गया। इस वृद्धि के बाद भी यह 645 अरब डॉलर के उच्च स्तर से काफी कम है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा, आरबीआई को रुपये को धीरे-धीरे कमजोर होने देना चाहिए। विदेशी मुद्रा भंडार का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए। उनकी इस टिप्पणी को सरकार की पहली आधिकारिक टिप्पणी के रूप में भी देखा जा रहा है क्योंकि इस साल की शुरुआत में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट को लेकर चिंताएं सामने आई थीं।
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सीईए ने ऐसे समय में यह टिप्पणी की है, जब केंद्रीय बैंक रुपये की गिरावट थामने के लिए 110 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली कर चुका है। उन्होंने कहा, हमें विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना चाहिए। फिर भी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था के पास विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने कहा, व्यापार घाटे पर काबू पाना इस साल की प्राथमिक चुनौती होगी।
फॉरेक्स रिकॉर्ड स्तर से काफी कम
21 अक्तूबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स) घटकर जुलाई, 2020 के बाद दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, 28 अक्तूबर वाले सप्ताह में यह बढ़कर 531 अरब डॉलर पहुंच गया। इस वृद्धि के बाद भी यह 645 अरब डॉलर के उच्च स्तर से काफी कम है।
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देश की आर्थिक स्थिति बेहतर
उन्होंने कहा, कई वैश्विक संकट के बावजूद 2022-23 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.5-7.4 फीसदी रह सकती है। हालांकि, आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए व्यापार घाटे पर ध्यान देने की जरूरत है।