सीबीआई ने करीब 2100 करोड़ रुपये के बैंक फर्जीवाड़े में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पहला मामला एसबीआई व चार अन्य बैंकों के समूह से 1438.45 करोड़ की धांधली में मुंबई की एक निजी कंपनी के खिलाफ तो दूसरा 710.85 करोड़ के फर्जीवाड़े में अहमदाबाद का एक मामला है।
पहले मामले में दर्ज एफआईआर में मुंबई की उशदेव इंटरनेशनल लिमिटेड, उसके निदेशक (गारंटर) सुमन विजय गुप्ता, प्रतीक विजय गुप्ता और अज्ञात जन सेवकों व अन्य के नाम हैं। लोहे व अन्य धातु के कारोबार वाली इस कंपनी पर आरोप था कि उसके निदेशकों ने कुछ अज्ञात फर्मों के साथ भारतीय स्टेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, भारतीय सेंट्रल बैंक, ओरिएंअल बैंक ऑफ कॉमर्स और बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 1438 करोड़ रुपये की चपत लगाई।
इन लोगों ने बैंक से लिए कर्ज को ठिकाने लगाया और विदेश में की गई बिक्री में नुकसान दिखाया। बैंक की रकम नहीं लौटाने के लिए बही खातों में भी फेरबदल किया। यही नहीं इन लोगों ने बैंक से ली रकम को पांच से नौ साल से काम नहीं कर रहीं फर्मों को एडवांस दिया और उनसे जुड़ी फर्मों को भी कर्ज बांटे। सीबीआई ने मुंबई व पुणे के तीन ठिकानों पर छापे मारे और कुछ दस्तावेज भी जब्त किए।
दूसरे मामले में सीबीआई ने अहमदाबाद की निजी कंपनी और सके छह निदेशकों व अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की। आरोप है कि इन लोगों ने बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई, एसबीआई, पीएनबी ओर शामराव विट्ठल सहकारी बैंक व आईएफसीआई लिमिटेड को 710.85 करोड़ रुपये की चपत लगाई। इसमें अनिल लिमिटेड के अमोल श्रीपाल सेठ, कमलभाई आर सेठ, अनीश कस्तूरभाई शाह, इंदिरा जे पारिख दीपल पालकीवालना, अनुराग कोठावाला, शशीन ए देसाई को आरोपी बनाया है। ये सभी लोग कंपनी के निदेशक हैं। सीबीआई दोनों ही मामलों में जांच कर रही है।