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उद्योगों को बड़ी राहत: सरकार ने बदले कैप्टिव पावर जनरेशन के नियम, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगी रफ्तार

Sat, 14 Mar 2026 09:15 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत सरकार ने कैप्टिव पावर जनरेशन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। उद्योगों के लिए आसान हुए नियम। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर इस विस्तृत बिजनेस रिपोर्ट को पढ़ें।
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बिजली संयंत्र (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई / रॉयटर्स
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विस्तार
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भारत के ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। 'इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026' को अधिसूचित करते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने कैप्टिव पावर जनरेशन के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किए गए इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य उद्योगों के लिए नियामक अस्पष्टता को खत्म करना और भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को हासिल करना है।

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नए नियमों के तहत कैप्टिव पावर प्लांट्स के स्वामित्व की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है। अब इसमें उस इकाई की सहायक कंपनियों, होल्डिंग कंपनियों और होल्डिंग कंपनी की अन्य सहायक कंपनियों को भी शामिल किया गया है, जो कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट स्थापित करती हैं। यह स्पष्टीकरण आधुनिक कॉर्पोरेट संरचनाओं को मान्यता देता है, जहां बिजली संपत्तियों को अक्सर समूह संस्थाओं या स्पेशल पर्पस व्हीकल के माध्यम से विकसित किया जाता है। 

इस नीतिगत बदलाव से यह सुनिश्चित होगा कि कॉरपोरेट समूहों के वैध कैप्टिव निवेश को केवल उनकी संगठनात्मक संरचना के कारण कैप्टिव दर्जे से वंचित न किया जाए। इसके अलावा, नियमों के अनुपालन को आसान बनाने के लिए कई प्रावधानों को सरल किया गया है।
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कैप्टिव पावर जेनरेशन का मतलब है किसी उद्योग या व्यावसायिक प्रतिष्ठान द्वारा अपनी बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वयं का बिजली संयंत्र स्थापित करना। यह बिजली ग्रिड से खरीदने के बजाय, साइट पर ही (कोयला, गैस, या नवीकरणीय ऊर्जा से) पैदा की जाती है, जो निरंतर और सस्ती बिजली सुनिश्चित करती है।

सरचार्ज और सत्यापन से जुड़ी बड़ी राहत

उद्योगों के लिए अनुपालन और वित्तीय मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण नियम तय किए गए हैं:

  • शुल्क से बचाव: एक नया प्रावधान जोड़ा गया है जिससे कैप्टिव स्थिति के सत्यापन के दौरान डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसधारियों द्वारा उपभोक्ताओं पर शुल्क लगाने से बचा जा सकेगा।
  • सीएसएस और एएस पर छूट: यदि कैप्टिव उपयोगकर्ता एनएलडीसी (अंतर-राज्यीय मामलों के लिए) या राज्य नोडल एजेंसी (अंतर-राज्यीय मामलों के लिए) की प्रक्रियाओं के अनुसार निर्धारित घोषणा जमा करते हैं, तो उन पर क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज (सीएसएस) और अतिरिक्त सरचार्ज (एस) नहीं लगाया जाएगा।
  • जुर्माने का प्रावधान: यदि कोई प्लांट सत्यापन में कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट के रूप में विफल रहता है, तो लागू सीएसएस और एएस, कैरिंग कॉस्ट के साथ देय होंगे। इस कैरिंग कॉस्ट की गणना 2022 के 'इलेक्ट्रिसिटी (लेट पेमेंट सरचार्ज एंड रिलेटेड मैटर्स) रूल्स' के तहत लेट पेमेंट सरचार्ज की बेस दर पर की जाएगी।
  • सत्यापन की अवधि: कैप्टिव स्थिति के सत्यापन की प्रक्रिया अब पूरे वित्तीय वर्ष के लिए की जा सकेगी।

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