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हवाई सफर महंगा: क्या है फ्यूल सरचार्ज? एअर इंडिया, इंडिगो और आकासा एयर ने क्यों लिया किराया बढ़ाने का फैसला

Sat, 14 Mar 2026 06:59 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंडिगो, एअर इंडिया और अब आकासा एयर। देश की इन प्रमुख विमानन कंपनियों ने हवाई टिकटों पर ईंधन अधिभार वसूलने का फैसला किया है। इसका असर सीधे तौर पर हवाई किराए पर पड़ेगा। क्या है यह फ्यूल सरचार्ज या ईंधन अधिभार? इसे क्यों लागू किया जा रहा है? समझने के लिए पढ़ें।
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हवाई किराया - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में तनाव जारी का असर अब हवाई यात्रियों की जेब पर पर पड़ना तय है। एअर इंडिया, इंडिगो और आकासा एयर जैसी प्रमुख भारतीय एयरलाइंस ने अपनी बढ़ती लागत से निपटने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन अधिभार यानी फ्यूल सरचार्ज वसूलने का निर्णय लिया है। आइए इस आसान सवाल-जवाब  के जरिए समझते हैं कि यह सरचार्ज क्या है, हवाई किराए बढ़ने का खतरा क्यों है और इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा।

क्या होता है ईंधन अधिभार या फ्यूल सरचार्ज?

विमानन ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो उड़ानों का संचालन करने वाली कंपनियां अपनी बढ़ती लागत की भरपाई के लिए टिकट पर एक अतिरिक्त शुल्क लगाती हैं, इसे ही ईंधन अधिभार या फ्यूल सरचार्ज कहा जाता है। यह शुल्क हवाई यात्रा के मूल किराये से अलग होता है और इससे यात्री की जेब पर किराये का कुल भार बढ़ जाता है। चूंकि एयरलाइंस के कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत होती है, इसलिए ईंधन के महंगा होने पर ऐसे शुल्क लगाना कंपनियों की व्यावसायिक मजबूरी बन जाती है।

मौजूदा हालात में विमानन कंपनियों ने ईंधन अधिभार लगाने का फैसला क्यों लिया?

हालिया दिनों में पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच देश की प्रमुख विमानन कंपनियों ने हवाई यात्रियों से ईंधन अधिभार वसूलने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका (इस्राइल समर्थित) के बीच घमासान चल रहा है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल के निर्यात में बाधा उत्पन्न हुई है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके अलावा, सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए कई एयरलाइंस पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र से बचकर लंबी दूरी के वैकल्पिक मार्गों से उड़ान भर रही हैं। लंबे रूट की वजह से ईंधन की खपत ज्यादा हो रही है, जिससे परिचालन लागत काफी बढ़ गई है।

भारत की प्रमुख एयरलाइंस ने सरचार्ज में कितना इजाफा किया है?

लागत को संतुलित करने के लिए भारत की मुख्य एयरलाइंस ने अलग-अलग दरें तय की हैं:

  • एअर इंडिया: 12 मार्च से घरेलू उड़ानों पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाया गया है। 18 मार्च से दूसरे चरण में यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की उड़ानों के लिए इस सरचार्ज में 25 से 50 डॉलर तक की वृद्धि की जाएगी।
  • इंडिगो: 14 मार्च से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टिकटों पर 425 रुपये से लेकर 2,300 रुपये तक का सरचार्ज लागू हो गया है। इसमें घरेलू उड़ानों के लिए 425 रुपये और यूरोप जैसी लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 2,300 रुपये तक का चार्ज शामिल है।
  • आकासा एयर: 15 मार्च से बुक होने वाले टिकटों पर उड़ान की अवधिके आधार पर 199 रुपये से 1,300 रुपये के बीच सरचार्ज लगाया गया है।

क्या पश्चिम एशिया के इस तनाव से वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ा है?

जी हां। ईरान की ओर से फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर किए गए हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही लगभग रुक गई है। यह एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति होती है। हालांकि, ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भारत के लिए राहत की बात यह है कि भारतीय एलपीजी आपूर्ति से जुड़े दो महत्वपूर्ण जहाज- 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' इस होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन  के महानिदेशक विली वॉल्श के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात में दुनिया भर में हवाई किराए 9% तक महंगे हो सकते हैं। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, विमानन कंपनियों का खर्च ऊंचा बना रहेगा। फिलहाल, हवाई यात्रियों को इस अतिरिक्त खर्च के लिए तैयार रहना होगा।

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