कैबिनेट द्वारा मंजूर नीति में स्थापित लक्ष्यों में वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत का योगदान बढ़ाना, नवाचार का निर्माण, डिजिटल संचार क्षेत्र में स्टार्ट-अप को बढ़ाना भी शामिल है। साथ ही, भारत में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त आईपीआर का निर्माण, क्षेत्र में मानक आवश्यक पेटेंट का विकास, डिजिटल संचार प्रौद्योगिकी, नई आयु कौशल के निर्माण के लिए 10 लाख लोगों को प्रशिक्षण और पुन: कौशल, आईओटी पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार 5 करोड़ संबंधित उपकरणों तक बढ़ाना और चौथे मानक के उद्योग को तेज करना शामिल है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने नीति जारी करते हुए कहा था कि इसका मकसद डिजिटल संचार नेटवर्क की परिवर्तनीय शक्ति की बाधाओं को हटाना है।
उचित होंगी स्पेक्ट्रम की कीमतें
नीति के मसौदे में कहा गया है कि भारत के सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए स्पेक्ट्रम एक प्रमुख प्राकृतिक संसाधन है। इस कारण से प्रमुख रणनीतियों में नए ब्रॉडबैंड युग के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने और उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण पर इसमें कहा गया है कि डिजिटल संचार के लिए टिकाऊ और किफायती पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्पेक्ट्रम का मूल्य उचित होना चाहिए। वायरलेस फ्रीक्वेंसी आवंटन पर वायरलेस योजना और समन्वय (डब्ल्यूपीसी) के अलावा स्थायी सलाहकार समिति हो, ताकि अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल बने।