फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैबिनेट से मंजूरी: आईडीबीआई बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार; फेयरफैक्स की कनाडाई कंपनी करेगी अधिग्रहण

Wed, 14 Oct 2026 05:22 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की 60.72% हिस्सेदारी पर बड़ा फैसला लिया। कैबिनेट ने यह हिस्सेदारी फेयरफैक्स की कनाडाई इकाई को 52,878.08 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद इसे भारतीय वित्तीय क्षेत्र का सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) माना जा रहा है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन
कौन खरीद रहा आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी। - फोटो : amarujala.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में बुधवार को एक सरकार की ओर से एक बड़ा फैसला लिया गया। आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की एक बड़ी हिस्सेदारी के विनिवेश को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आईडीबीआई बैंक में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम की कुल 60.72 प्रतिशत रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। 

विज्ञापन


कनाडाई वित्तीय समूह 'फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स' की सहायक कंपनी 'M/s 10955230 कनाडा इंक्वायरी' इस बैंक की नई रणनीतिक खरीदार बनेगी। माना जा रहा है कि 52,878.08 करोड़ रुपये का यह सौदा पूरा होने के बाद भारतीय वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश होगा।

आईडीबीआई बैंक सौदे का पूरा ढांचा क्या है?

  • किसकी कितनी हिस्सेदारी बिकेगी: इस रणनीतिक बिक्री प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। 
  • कितनी हिस्सेदारी बचेगी: इस सौदे के पूरा होने के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रहेगी। सरकार और एलआईसी के पास संयुक्त रूप से 34 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी।
  • भविष्य में सरकार की शेष 15 प्रतिशत हिस्सेदारी को खुले बाजार के जरिए बेचने के अधिकार अधिकार प्राप्त मंत्री समूह को सौंपे गए हैं।

बोली प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?

सरकार की ओर से आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी में यह रणनीतिक बिक्री दो-स्तरीय पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए पूरी की गई, जिसकी निगरानी अंतर-मंत्रालयी समूह और विनिवेश से जुड़े सचिवों के मुख्य समूह ने की। 

  • वैधता और सुरक्षा जांच:  बोलीदाताओं के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से 'फिट एंड प्रॉपर' जांच और गृह मंत्रालय से सुरक्षा क्लीयरेंस प्राप्त करना अनिवार्य रखा गया था।
  • प्रति शेयर मूल्यांकन: दो स्वतंत्र पेशेवर मूल्यांकन एजेंसियों ने बैंक का औसतन 75.99 रुपये प्रति शेयर का निष्पक्ष मूल्यांकन किया था।
  • सफल बोली: फेयरफैक्स ने 81 रुपये प्रति शेयर की सफल बोली लगाई, जो स्वतंत्र एजेंसियों के आकलित मूल्य से अधिक थी। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 में आई शुरुआती बोलियां 94.42 रुपये प्रति शेयर के रिजर्व प्राइस से कम रहने के कारण खारिज कर दी गई थीं।

घाटे और प्रतिबंधों से उबरकर आईडीबीआई बैंक ने कैसे किया वित्तीय बदलाव?

आईडीबीआई बैंक की स्थापना 1964 में एक विकास वित्तीय संस्थान के रूप में हुई थी और 2004 में इसे वाणिज्यिक बैंक बनाया गया। वर्ष 2010 से 2020 के दौरान सरकार ने बैंक को उबारने के लिए लगभग 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी।

  • पीसीए प्रतिबंधों से मुक्ति: बढ़ते एनपीए और घाटे के कारण मई 2017 में आरबीआई ने बैंक को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) ढांचे में डाल दिया था, जिसे सुधार के बाद मार्च 2021 में हटा लिया गया।
  • एनपीए में भारी गिरावट: बैंक का ग्रॉस एनपीए सितंबर 2018 के 31.78 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 2.32 प्रतिशत रह गया। वहीं नेट एनपीए 17.30 प्रतिशत से गिरकर महज 0.15 प्रतिशत पर आ गया।
  • मजबूत वित्तीय प्रदर्शन: वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने **9,513 करोड़ रुपये** का शुद्ध लाभ कमाया। 30 सितंबर 2026 तक इसका कुल कारोबार 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 6,27,149 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

सौदा पूरा होने के बाद आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है। सफल बोलीदाता फेयरफैक्स को अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के समक्ष अपनी साख साबित करनी होगी और केंद्रीय बैंक की विनियामक शर्तों के पालन का रोडमैप सौंपना होगा। एलआईसी अपनी बची हुई 19 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रबंधन अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और विनियामक दिशानिर्देशों के तहत करेगी।

इस सौदे के दूरगामी परिणाम क्या हो सकते हैं?

आईडीबीआई बैंक का यह रणनीतिक विनिवेश भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के पुनर्गठन और निजी पूंजी को आकर्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। एक समय भारी घाटे और एनपीए से जूझने वाले बैंक का अब मजबूत बैलेंस शीट के साथ निजी हाथों में जाना न केवल बैंकिंग क्षेत्र में नई प्रतिस्पर्धा को जन्म देगा, बल्कि भारत के वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश के नए रास्ते भी खोलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें