एमडीएल ने नौसेना को युद्धपोत 'नीलगिरी' और 'सूरत' सौंपा
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने शुक्रवार को नौसेना को प्रोजेक्ट 17-ए क्लास का पहला स्टील्थ फ्रिगेट (टोही युद्धपोत) नीलगिरी और प्रोजेक्ट 15-बी क्लास का चौथा स्टील्थ डिस्ट्रायर (विध्वंसक युद्धपोत) सूरत सौंप दिया।
नौसेना की ओर से जारी बयान के अनुसार अब इन युद्धपोतों को जरूरी समुद्री परीक्षणों से गुजारा जाएगा, इसके बाद इन्हें जल्द ही नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। कमीशनिंग के बाद इनका नाम आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस सूरत रखा जाएगा। बयान के अनुसार, नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने इन्हें डिजाइन किया है। इसका निर्माण एमडीएल ने किया है और इसकी देखरेख मुंबई की युद्धपोत निगरानी टीम ने की है। एमडीएल ने कहा कि प्रोजेक्ट17-ए का फर्स्ट ऑफ क्लास (एफओसी) युद्धपोत नीलगिरी अत्याधुनिक उन्नत तकनीक से लैस है और यह इस श्रेणी में दुनिया के शानदार युद्धपोतों में से एक है। नीलगिरी में अत्याधुनिक स्टील्थ विशेषताएं (रडार को चकमा देने की खासियत) और अत्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है। यह दुश्मन की पनडुब्बियों, युद्धपोतों, जहाज-रोधी मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को तबाह करने में सक्षम है। इसे बिना किसी सहायक जहाज के स्वतंत्र रूप से संचालित किया जा सकता है।
डिस्ट्रायर युद्धपोत सूरत एक साथ कई मिशन को अंजाम देने में हैं सक्षम
बयान के अनुसार, सूरत प्रोजेक्ट15-बी का चौथा विध्वंसक युद्धपोत है। यह एक शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है, जो समुद्री युद्ध के दौरान कई तरह के कार्यों और मिशन को अंजाम देने में सक्षम है। यह सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों और बराक-8 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस है। इसे स्वदेशी रूप से विकसित पनडुब्बी रोधी हथियारों और सेंसर से सुसज्जित किया गया है। इसमें सोनार हम्सा एनजी, भारी वजन वाले टारपीडो ट्यूब लांचर और एएसडब्ल्यू रॉकेट लांचर शामिल हैं।
विश्व बैंक ने दी अमरावती निर्माण के लिए 80 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी
विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने आंध्र प्रदेश की ग्रीनफील्ड राजधानी शहर अमरावती के निर्माण के लिए 80 करोड़ अमरीकी डॉलर के अमरावती एकीकृत शहरी विकास कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को विश्व बैंक ने यह जानकारी दी। ब्रेटन वुड्स संस्थान के कार्यकारी निदेशक मंडल ने बृहस्पतिवार को वाशिंगटन की बैठक में कार्यक्रम राशि के लिए ऋण को मंजूरी दी।
विश्व बैंक के मुताबिक, विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने कल 80 करोड़ अमरीकी डॉलर के अमरावती एकीकृत शहरी विकास कार्यक्रम को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य अमरावती शहर को आंध्र प्रदेश में बेहतरीन प्रबंधित, जलवायु-लचीला विकास केंद्र के तौर पर स्थापित करना है जो रोजगार पैदा करता है और अपने वर्तमान और भविष्य के निवासियों, खास तौर से सबसे कमजोर लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है। भारत सरकार ने अमरावती को एक आर्थिक केंद्र और आंध्र प्रदेश की राजधानी के तौर पर विकसित करने के लिए इस ऋण का अनुरोध किया था। विश्व बैंक ने कहा कि ऋण की आखिरी परिपक्वता अवधि 29 साल है। इसमे छह साल की छूट अवधि भी शामिल है। भारत सरकार ने ऋण राशि जापानी येन में लेने का फैसला किया है। भारत के लिए विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे तानो कौमे ने कहा कि 2050 तक शहरी आबादी दोगुनी होकर 95 करोड़ ( 950 मिलियन) होने की उम्मीद है और भारत का लक्ष्य विकास केंद्रों के तौर में टिकाऊ और रहने योग्य शहरों का निर्माण करना है। इस कड़ी में अमरावती इस शहरी बदलाव को मॉडल के तौर पर विकसित करने का शानदार मौका देता है।
इंडसइंड बैंक पर 27.30 लाख रुपये का जुर्माना
आरबीआई ने जमा पर ब्याज दरों के नियमों के उल्लंघन के मामले में इंडसइंड बैंक पर 27.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने 31 मार्च, 2023 तक निरीक्षण किया था। इसमें उसे बैंक की गलती मिली। इसके बाद कारण बताओ नोटिस भेजा। इसके बाद इंडसइंड बैंक पर जुर्माना लगाने का फैसला किया गया।
मन्नापुरम पर 20 लाख रुपये का दंड
अपने ग्राहक को जानो यानी केवाईसी से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले में आरबीआई ने मन्नापुरम पर 20 लाख रुपये का दंड लगाया है। मन्नापुरम की 31 मार्च, 2023 तक जांच की गई थी। इस जांच में केंद्रीय बैंक को खामी मिली। कंपनी ग्राहकों के पैन कार्ड का सत्यापन करने में विफल रही जिसके बाद उस पर जुर्माना लगाया गया है।