एसबीआई की एक शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 8-10 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। हालांकि, सोमवार को स्थानीय मुद्रा अपने सर्वकालिक निम्नतम स्तर पर पहुंच गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024: ट्रंप 2.0 का भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा शीर्षक वाली रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कुछ समय के लिए गिरावट आ सकती है, जिसके बाद इसमें तेजी लौट सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड जे. ट्रम्प की ऐतिहासिक वापसी ने बाजारों और चुनिंदा परिसंपत्ति वर्गों को एक नया झटका दिया है, अब ध्यान व्यापक आर्थिक प्रभाव और आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "ट्रंप की जीत भारत के लिए चुनौतियों और अवसरों का मिश्रण लेकर आई है। टैरिफ में वृद्धि, एच-1बी प्रतिबंध और मजबूत डॉलर की संभावना अल्पकालिक अस्थिरता ला सकती है... लेकिन यह भारत को अपने विनिर्माण का विस्तार करने, निर्यात बाजारों में विविधता लाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक प्रोत्साहन भी प्रदान करती है।"
लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे गिरकर 84.39 (अनंतिम) के नए सर्वकालिक निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और घरेलू शेयर बाजारों में नरम रुख के कारण यह गिरावट आई।
विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि जब तक डॉलर सूचकांक में नरमी नहीं आती या विदेशी फंड के बहिर्वाह में कमी नहीं आती, रुपया पर दबाव बना रहेगा। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि रुपये में तीव्र गिरावट आने की "आशंका" निराधार है।
चालू वित्त वर्ष में अबतक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.41 प्रतिशत बढ़कर 12.11 लाख करोड़ रुपये हुआ
इस साल एक अप्रैल से 10 नवंबर के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.41 प्रतिशत बढ़कर 12.11 लाख करोड़ रुपये रहा है।केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आंकड़ों के अनुसार, इसमें 5.10 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध कॉरपोरेट कर और 6.62 लाख करोड़ रुपये का गैर-कॉरपोरेट कर (व्यक्तियों, एचयूएफ, फर्मों द्वारा भुगतान किए गए करों सहित) शामिल हैं। अन्य करों के मद में 35,923 करोड़ रुपये आए। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से 10 नवंबर के दौरान प्रत्यक्ष कर का सकल संग्रह 21.20 प्रतिशत बढ़कर 15.02 लाख करोड़ रुपये रहा।
इस दौरान 2.92 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए, जो एक साल पहले की तुलना में 53 प्रतिशत अधिक है। रिफंड के समायोजन के बाद, शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (जिसमें कॉरपोरेट, गैर-कॉरपोरेट और अन्य कर शामिल हैं) लगभग 12.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 10.49 लाख करोड़ रुपये से 15.41 प्रतिशत अधिक है।