अमेरिका से अनिवासी भारतीयों के लिए भारत में पैसा भेजना आसान हो गया है। अमेरिकी सीनेट ने रकम ट्रांसफर पर लगने वाले 3.5 फीसदी टैक्स को घटाकर अब एक फीसदी कर दिया है। इसके लिए अमेरिकी सरकार ने वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट के मसौदे में संशोधन किया है। सीनेट के प्रस्ताव के अनुसार, यह टैक्स केवल 31 दिसंबर, 2025 के बाद किए गए रकम ट्रांसफर पर ही लागू होगा। अमेरिकी सीनेट के नए संस्करण में बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों में रखे गए खातों से किए गए ट्रांसफर को शामिल नहीं किया गया है। अमेरिका में जारी किए गए डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिये किए गए ट्रांसफर को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह है कि रोजाना ट्रांसफर का एक बड़ा हिस्सा नए कर के दायरे से बाहर हो सकता है। वन बिग ब्यूटीफुल बिल एक्ट ने अमेरिका में प्रवासी भारतीयों के बीच चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इससे अमेरिका से बाहर भेजे जाने वाले धन पर इसका असर पड़ सकता है। मूल रूप से विधेयक में 5 फीसदी कर लगाने की बात कही गई थी, लेकिन सदन के अंतिम संस्करण में इसे घटाकर 3.5 फीसदी कर दिया गया, जिससे अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) में चिंता पैदा हो गई थी। ये एनआरआई परिवारों की सहायता करने या भारत में निवेश करने के लिए नियमित रूप से धन भेजते हैं।
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भारत में आने वाली रकम में अमेरिका का हिस्सा 27 फीसदी
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार, भारतीय अमेरिका में दूसरे सबसे बड़े विदेशी मूल के समूह हैं। इनकी संख्या 2023 तक 29 लाख से अधिक होगी। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में भारत के कुल आने वाली रकम का 27.7% हिस्सा अमेरिका से आया था, जो लगभग 32 अरब डॉलर है।
सीबीडीटी चीफ रवि अग्रवाल का कार्यकाल जून 2026 तक बढ़ा
केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) अध्यक्ष रवि अग्रवाल का कार्यकाल जून 2026 तक बढ़ा दिया है। बता दें कि रवि अग्रवाल 1988 बैच तक के आईआरएस अधिकारी हैं। उन्हें पिछले साल सीबीडीटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी नितिन गुप्ता का स्थान लिया था। रवि का कार्यकाल इस साल समाप्त होने वाला था लेकिन अब सरकार ने उनका कार्यकाल एक साल और बढ़ा दिया है। सीबीडीटी आयकर विभाग का सर्वोच्च नीति निर्धारण निकाय है। इसमें एकअध्यक्ष और छह सदस्य हो सकते हैं।
डाकघर में एक अगस्त से स्वीकार होंगे डिजिटल पेमेंट
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देश भर के सभी डाकघर में अब अगस्त से डिजिटल पेमेंट स्वीकार किया जाएगा। डाकघर अपनी सूचना एवं प्रौद्योगिकी यानी आईटी प्रणाली में एक नया एप्लीकेशन शुरू कर रहे हैं। इसे जुलाई अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। अभी तक डाकघर डिजिटल भुगतान इसलिए स्वीकार नहीं करते हैं क्योंकि उनके खाते यूनिक पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) प्रणाली से समन्वयित नहीं हैं। सरकारी अधिकारी के मुताबिक, डाक विभाग आईटी बुनियादी ढांचे को लागू कर रहा है। इसमें नए एप्लिकेशन होंगे जो डायनॉमिक क्यूआर कोड के साथ लेनदेन करने में सक्षम होंगे। अगस्त तक सभी डाकघरों में इसकी शुरुआत हो जाएगी।
कर्नाटक सर्कल में शुरू किया नई प्रणाली का पायलट रोलआउट
आईटी 2.0 के तहत नई प्रणाली का पायलट रोलआउट कर्नाटक सर्कल में शुरू किया गया है। मैसूर हेड ऑफिस, बागलकोट और इसके अधीनस्थ कार्यालयों में मेल उत्पादों की क्यूआर-आधारित बुकिंग सफलतापूर्वक की गई। डाक विभाग ने डिजिटल लेनदेन करने के लिए डाकघरों के बिक्री काउंटरों पर क्यूआर कोड की शुरुआत की थी। हालांकि, बार-बार होने वाली तकनीकी कठिनाइयों और ग्राहकों की शिकायतों के कारण इसे बंद कर दिया गया था।
एप बता देगा किस रास्ते पर सबसे कम टोल
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का राजमार्गयात्रा एप अब बताएगा कि किन्हीं दो स्थानों के बीच सबसे कम टोल वाला रास्ता कौन सा है। यह नया फीचर अगले महीने से एप पर उपलब्ध होगा। यह एप यात्रियों को राष्ट्रीय राजमार्गों की व्यापक जानकारी देता है और उन्हें कुशल शिकायत निवारण प्रणाली भी देता है।
भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी के कुशल परिवहन प्रणाली के मुख्य उत्पाद अधिकारी अमृत सिंह ने बताया कि दिल्ली से लखनऊ यात्रा करने के लिए तीन रास्ते हैं और एप यात्रियों को सबसे अच्छा रास्ता चुनने में मदद करेगा। सिंह ने कहा, आप दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे से लखनऊ जा सकते हैं। दूसरा मार्ग, गाजियाबाद-अलीगढ़-कानपुर-लखनऊ और तीसरा मार्ग मुरादाबाद-बरेली-सीतापुर-लखनऊ है। एप वाहन चालकों को दिल्ली-लखनऊ के बीच सबसे कम टोल वाले रास्ते के बारे में बताएगा।
चालू खाता अधिशेष चौथी तिमाही में 13.5 अरब डॉलर पर
देश का चालू खाता वित्त वर्ष 2024-25 की जनवरी-मार्च तिमाही में 13.5 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) के अधिशेष में रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.5 प्रतिशत) था। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में यह 11.3 अरब डॉलर के घाटे में था। किसी देश के चालू खाते से यह पता चलता है कि संबंधित देश ने निर्यात से कितना कमाया और आयात पर कितना खर्च किया। इसके अलावा निवेश से आय और ट्रांसफर से जुड़े लेन-देन भी इसमें शामिल होते हैं। सालाना आधार पर चालू खाता घाटा 2024-25 में 23.3 अरब डॉलर (जीडीपी का 0.6 प्रतिशत) रहा जो 2023-24 में 26 अरब डॉलर के घाटे से कम है। मार्च तिमाही में 59.5 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार घाटा हुआ जबकि 2023-24 की चौथी तिमाही में यह 52 अरब डॉलर था। शुद्ध सेवा प्राप्तियां इस दौरान 53.3 अरब डॉलर हो गईं जो एक साल पहले की समान अवधि में 42.7 अरब डॉलर थीं। व्यावसायिक और कंप्यूटर सेवाओं जैसी प्रमुख श्रेणियों में सेवा निर्यात में सालाना आधार पर वृद्धि हुई है।
आधार सक्षम भुगतान प्रणाली में अब टचपाइंट ऑपरेटर भी होंगे शामिल
भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने बैंकों को सुरक्षा बढ़ाने के लिए आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) टचपॉइंट ऑपरेटरों को शामिल करने का आदेश दिया है। हालांकि, किसी भी ऑपरेटर को शामिल करने से पहले उनकी उचित जांच पड़ताल करनी होगी। यह निर्देश एक जनवरी से लागू होगा। आरबीआई ने कहा, यदि ऑपरेटर की बिजनेस करेस्पांडेंट या उप एजेंट के रूप में पहले ही जांच पड़ताल की गई है तो उसकी जांच जरूरी नहीं है। ऐसे मामलों में जहां ऑपरेटर लगातार तीन महीने तक निष्क्रिय रहता है, बैंकों को उसे आगे लेनदेन करने की अनुमति देने से पहले उसका फिर से केवाईसी करना होगा। हाल के दिनों में ग्राहकों के डाटा के साथ समझौता होने के कारण एईपीएस के जरिये धोखाधड़ी की खबरें आई हैं।
बैंक ग्राहकों को इस तरह की धोखाधड़ी से बचाने के लिए और सिस्टम की सुरक्षा में भरोसा और विश्वास बनाए रखने के लिए एईपीएस की मजबूती को बढ़ाया जा रहा है। निर्देशों में जोखिम प्रबंधन के उपाय भी शामिल हैं, जिनमें अधिग्रहणकर्ता बैंक को अपने लेनदेन निगरानी प्रणालियों के माध्यम से ऑपरेटर की गतिविधियों की निरंतर निगरानी करने और व्यावसायिक जोखिम प्रोफाइल के आधार पर परिचालन मापदंड निर्धारित करना होगा।