भारत के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (बंदरगाह बुनियादी ढांचे) के क्षेत्र से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। देश की दिग्गज कंपनी अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसई) ने एक अहम विदेशी डील का ऐलान किया है। दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी, स्विट्जरलैंड की एमएससी (एमएससी) ग्रुप, अदाणी के विझिंजम पोर्ट में 1.4 अरब डॉलर (करीब 11,600 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है। यह डील भारतीय बंदरगाह बुनियादी ढांचे के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश है।
2031 तक टाटा मोटर्स लाएगी चार नई इलेक्ट्रिक कारें
टाटा मोटर्स ने वित्त वर्ष 2031 तक चार नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च करने और मौजूदा पोर्टफोलियो के 10 से अधिक मॉडल को फेसलिफ्ट एवं अपग्रेड करने की योजना बनाई है। कंपनी ने कहा, उसका लक्ष्य भारतीय बाजार में 30 फीसदी से अधिक ईवी गाड़ियां उतारना है। फिलहाल टाटा की छह ईवी कार हैं।
अब ग्रीस के साथ रक्षा, कृषि क्षेत्रों में कारोबार के अवसर तलाशेगा भारत
यूके दौरे के बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल अब ग्रीस पहुंच गया है। इसमें द्विपक्षीय व्यापार, निवेश प्रवाह और रणनीतिक आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। भारत अब भारत ग्रीस के साथ रक्षा, खाद्य, आधारभूत ढांचा एवं कृषि समेत कई क्षेत्रों में कारोबार-निवेश के अवसर तलाशेगा।
ग्रीस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल द एथेंस स्टार्टअप बिजनेस इन्क्यूबेटर स्टार्टअप सत्रों में भाग लेगा। एथेंस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के जरिए भारतीय और यूनानी उद्योग जगत के नेताओं के साथ निजी क्षेत्र की साझेदारियों को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। दोनों देशों के प्रमुख हितधारकों की भागीदारी वाला एक उच्चस्तरीय व्यापारिक संवाद भी आयोजित किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ग्रीस के प्रमुख उद्योग प्रतिष्ठानों का भी दौरा करेगा, जहां उन्नत विनिर्माण और प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। इस कवायद का मकसद भारत-ग्रीस द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों का विस्तार करना बताया जा रहा है। इस पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यूके की यात्रा कर प्रस्तावित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते को लागू करने के तरीकों पर वहां के मंत्रियो व अधिकारियों के साथ बात की।
RBI: भारत का बाहरी कर्ज मार्च 2026 तक 762.8 अरब डॉलर पर पहुंचा
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक भारत का कुल बाहरी कर्ज 762.8 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 26.3 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्शाता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को यह जानकारी जारी की।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये और अन्य प्रमुख मुद्राओं के मूल्य में वृद्धि के कारण 24.6 अरब अमेरिकी डॉलर का मूल्यांकन प्रभाव पड़ा। इस मूल्यांकन प्रभाव को हटा दें तो बाहरी कर्ज में 51 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि होती। बाहरी कर्ज का सकल घरेलू उत्पाद अनुपात बढ़कर 20.8 फीसदी हो गया है। यह एक साल पहले 19.8 फीसदी था।
मार्च 2026 के अंत तक दीर्घकालिक कर्ज 613.5 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें 11.6 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। कुल बाहरी कर्ज में अल्पकालिक कर्ज का हिस्सा 19.6 फीसदी हो गया है। यह पिछले साल 18.3 फीसदी था। अल्पकालिक कर्ज का विदेशी मुद्रा भंडार से अनुपात 21.6 फीसदी तक पहुंच गया। सामान्य सरकार का बकाया कर्ज घटा है, जबकि गैर-सरकारी कर्ज में वृद्धि हुई है।
कर्ज में अमेरिकी डॉलर का कितना हिस्सा है?
भारत के बाहरी कर्ज में अमेरिकी डॉलर-मूल्यवर्गित कर्ज सबसे बड़ा घटक बना हुआ है। इसका कुल कर्ज में 55.5 फीसदी हिस्सा है। इसके बाद भारतीय रुपये-मूल्यवर्गित कर्ज का 29.4 फीसदी हिस्सा है। येन, एसडीआर2 और यूरो का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान है।
कर्ज के मुख्य घटक क्या हैं?
ऋण बाहरी कर्ज का सबसे बड़ा घटक है, जिसकी हिस्सेदारी 34.7 फीसदी है। मुद्रा और जमा का हिस्सा 22.3 फीसदी है। व्यापार ऋण और अग्रिम 19 फीसदी पर हैं। ऋण प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 16.1 फीसदी है।