डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने देशभर में खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए कई ऑपरेशन्स में 27 किलोग्राम से ज्यादा विदेशी मूल का तस्करी का सोना जब्त किया है और 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, एक सप्ताह तक चली कार्रवाई में विमान के टॉयलेट, गाड़ियों और बर्तनों में बनी खास जगहों और यात्रियों के शरीर में छिपाकर रखा गया सोना बरामद किया गया। इससे संगठित सोना तस्करी नेटवर्क के काम करने के बदलते तरीकों का पता चलता है।
महाराष्ट्र में कितना सोना मिला?
सबसे बड़ी बरामदगी में से एक में, डीआरआई अधिकारियों ने 23-24 जुलाई को अदीस अबाबा से आ रहे तीन यात्रियों को मुंबई में रोका और एक विमान के पिछले टॉयलेट की छत के पैनल में छिपाकर रखे गए लगभग 12 किलोग्राम वजन के छह विदेशी सोने के बार बरामद किए। इसके अलावा, जांच से पता चला कि यात्रियों ने सोना इसलिए छिपाया था ताकि एयरपोर्ट का स्टाफ उसे बाद में निकाल सके। अवैध सामान जब्त कर लिया गया और तीनों यात्रियों को गिरफ्तार कर लिया गया। मुंबई एयरपोर्ट पर 22-23 जुलाई को खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए एक और ऑपरेशन में, डीआरआई अधिकारियों ने तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया। यह गिरोह विमान के टॉयलेट में मोम के रूप में सोने का बुरादा छिपाता था, जिसे विमान की सफाई करने वाले मिली-भगत वाले कर्मचारी बाद में निकाल लेते थे।
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यूपी के अलावा और कहां पकड़े गए तस्कर?
इस ऑपरेशन में मोम के रूप में 3.7 किलोग्राम सोने का बुरादा जब्त किया गया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें कैरियर, सफाई कर्मचारी, हैंडलर और रिसीवर शामिल थे। उत्तर प्रदेश में, डीआरआई अधिकारियों ने 23 जुलाई को ब्रह्मपुत्र मेल से यात्रा कर रही एक महिला को रोका और उसकी कमर की बेल्ट और हैंडबैग में छिपाकर रखे गए लगभग 5 किलोग्राम वजन के 42 विदेशी सोने के बार बरामद किए। पूछताछ के दौरान, यात्री ने माना कि सोना बांग्लादेश के रास्ते भारत में तस्करी करके लाया गया था। सोना जब्त कर लिया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
19 और 20 जुलाई के बीच किए गए एक और ऑपरेशन में, डीआरआई अधिकारियों ने कोलकाता रेलवे स्टेशन पर एक यात्री को रोका और खास तौर पर बनाए गए बर्तनों में छिपाकर रखा गया 4.6 किलोग्राम विदेशी सोना बरामद किया। एजेंसी ने कोच्चि और गुवाहाटी में भी अलग-अलग ऑपरेशन किए और लगभग 2 किलोग्राम विदेशी सोना बरामद किया।
जंक फूड पर हेल्थ टैक्स का प्रस्ताव, ICMR और NIN ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट
चिप्स, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पैकेट वाले स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक, मोमो और मीठे पेय जैसे जंक फूड बच्चों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। आलम ये है कि भारत में 5-19 वर्ष के 4.1 करोड़ बच्चे अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित हैं। करीब 10% बच्चे प्री-डायबिटीज और एक फीसदी किशोरों को डायबिटीज है। 5% किशोर हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं। मतलब हर तीन में से एक बच्चा इसका शिकार है। इसलिए अब जंक फूड पर सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है। आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) ने 'सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है। इसमें ऐसे खाद्य पदार्थों और शक्कर वाले पेय पर स्वास्थ्य कर या टैक्स बढ़ाने की सिफारिश की गई है। तर्क है कि इन उत्पादों के महंगे होने से इनकी खरीद कम होगी और लोग स्वस्थ विकल्पों की ओर बढ़ेंगे। यही नहीं, इसके प्रचार-प्रसार पर भी सख्ती होगी। साथ ही स्वस्थ खाद्य पदार्थों को सस्ता और अधिक सुलभ बनाने का भी सुझाव दिया गया है।