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Biz Update: E20 पेट्रोल में गड़बड़ी से तेल कंपनियों का इनकार; FSSAI ने दो खाद्य कंपनी के लाइसेंस निलंबित किए

Sat, 08 Aug 2026 06:36 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
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बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स - फोटो : amarujala.com
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देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने शुक्रवार को ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठी चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि देश भर में की गई व्यापक जांच में ईंधन में नमी या क्लोराइड सम्मिश्रण का कोई प्रमाण नहीं मिला है। कंपनियों ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीएमएस) यानी ई20 की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के भीतर है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है।  तेल कंपनियों ने एक साझा बयान में कहा कि हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में ई20 पेट्रोल में नमी और क्लोराइड की मात्रा को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद पूरे आपूर्ति तंत्र (सप्लाई चेन) में अतिरिक्त और गहन परीक्षण अभियान चलाया गया। जांच के नतीजों में कहीं भी ईंधन के दूषित होने का प्रमाण नहीं मिला और सभी नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए।

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गुणवत्ता का नियंत्रण कितना प्रभावी?
कंपनियों ने कहा कि ईंधन की गुणवत्ता उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है। अगर किसी ऐसी समस्या की आशंका होती है जो वाहनों के प्रदर्शन या उपभोक्ताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकती है, तो उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाती है और आवश्यक सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाते हैं। कंपनियों के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल के लिए क्लोराइड की मात्रा को लेकर कड़े मानक निर्धारित किए हैं। इनका पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरी आपूर्ति शृंखला में उच्च स्तर की निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। कंपनियों के अनुसार, भारत की रिफाइनिंग और ईंधन वितरण प्रणाली में लागू गुणवत्ता नियंत्रण उपाय प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं और ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सामने आई आशंकाओं का कोई आधार नहीं है।

DRDO के लिए प्रदर्शन संकेतक, रक्षा बजट बढ़ाने की सिफारिश, संसदीय समिति ने क्या कहा?
रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और पूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। संसद में शुक्रवार को पेश एक रिपोर्ट में समिति ने DRDO को लागत दक्षता, तकनीकी परिपक्वता, लक्ष्य तिथियों और परिचालन प्रभावशीलता को कवर करने वाले स्पष्ट प्रदर्शन संकेतक (KPIs) शीघ्रता से अंतिम रूप देने की सिफारिश की। समिति ने DRDO में महिला कर्मचारियों को समान अवसर और स्थापित शिकायत निवारण तंत्र की सराहना की। उसने शिकायत तंत्र को मजबूत करने तथा यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम (POSH Act) के तहत शिकायतों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। समिति ने DRDO से परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, धन के उचित उपयोग और लागत वृद्धि को रोकने के कदमों की जानकारी देने को कहा।

शिक्षा और अनुसंधान बजट पर जोर
समिति ने शैक्षिक अवसरों के विस्तार हेतु व्यापक अध्ययन की अपनी पिछली सिफारिश दोहराई। इसमें आरक्षण बढ़ाने और व्यावसायिक कॉलेजों में रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षण की संभावना तलाशने का आग्रह भी किया गया। पैनल ने सरकार से अगले पांच वर्षों में रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट को लगातार बढ़ाने की भी जोरदार सिफारिश की। समिति ने कहा कि R&D में निरंतर निवेश तकनीकी आत्मनिर्भरता और भारतीय रक्षा उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए आवश्यक है। उसने रक्षा उत्पादन विभाग से 33,000 करोड़ रुपये के पांच वर्षीय R&D रोडमैप के कार्यान्वयन की निगरानी करने को कहा। इसका मकसद स्वदेशीकरण का लक्ष्य हासिल कर विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है।

US-भारत व्यापार 240 अरब रुपये से अधिक, द्विपक्षीय साझेदारी पर राजदूत गोर क्या बोले?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को भारत-अमेरिका साझेदारी की गहराई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत को प्रमुख निवेश गंतव्य मानती हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार एक दशक में 20 अरब रुपये से बढ़कर 240 अरब रुपये से अधिक हो गया है। गोर ने बंगलूरू में क्वांटम प्रदर्शनी में ये बातें कहीं। उन्होंने बताया कि अकेले कर्नाटक में 1,000 से अधिक अमेरिकी कंपनियां हैं। भारत और अमेरिका रक्षा, स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी तथा महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग करते हैं। अमेरिका की 40 फीसदी जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं। भारत अमेरिकी नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में भी शामिल हुआ है। गोर ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और मेटा, रॉल्स रॉयस, नेटप्लिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से भी मुलाकात की।
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FSSAI ने दो खाद्य कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन पर उत्तर प्रदेश की वीकेसी नट्स प्राइवेट लिमिटेड और महाराष्ट्र की चेडा स्पेशलिटीज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। प्राधिकरण के अनुसार, वीकेसी नट्स के निरीक्षण के दौरान तैयार उत्पाद रखने वाले क्षेत्र में पिस्ता के बीच जीवित कीड़े मिले। कच्चे माल के भंडारण क्षेत्र की दीवारों और छत पर भारी फफूंद भी पाई गई। कंपनी में जंग लगी, गंदी और क्षतिग्रस्त मशीनरी के साथ पुराने व गंदे बर्तन और प्लास्टिक ट्रे इस्तेमाल हो रहे थे। खुले क्रेट में रखे अंजीर के पास छिपकली और खाद्य उत्पादों पर मक्खियां भी मिलीं।

वहीं,  चेडा स्पेशलिटीज फूड्स में कर्मचारी खुले हाथों से बेसन का आटा मिला रहे थे। केले सड़े हुए कचरे के पास दूषित फर्श पर बैठकर छीले जा रहे थे। FSSAI ने कहा कि दोनों कंपनियों के लाइसेंस तब तक निलंबित रहेंगे, जब तक स्वच्छता, कीट नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे की मरम्मत और कर्मचारियों के प्रशिक्षण जैसे सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते।
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