CRISIL की रिपोर्ट- US टैरिफ से भारत में इक्विटी को अधिक झटका, अगस्त में 4 अरब USD की शुद्ध निकासी
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने कहा कि अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ से अगस्त में भारत के घरेलू वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा। इससे शेयर बाजारों को सबसे अधिक झटका लगा है। क्रेडिट रेटिंग इन्फॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ इंडिया लि. (क्रिसिल) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत का वित्तीय स्थिति सूचकांक (एफसीआई) जुलाई के माइनस 0.4 से घटकर अगस्त में माइनस 0.5 हो गया है। एफसीआई एक मासिक संकेतक है जो मुद्रा, ऋण, इक्विटी और विदेशी मुद्रा बाजारों के मापदंडों को जोड़ता है। कम एफसीआई यह बताता है कि वित्तीय स्थितियां पिछले महीने की तुलना में ज्यादा कड़ी थी। वहीं नकारात्मक मूल्य का अर्थ है कि यह दीर्घावधि औसत (अप्रैल 2010 से मापा गया) से ज्यादा कड़ी थी। इस मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद भारत का एफसीआई मानक विचलन के बेहतर दायरे में बना हुआ है।
एफपीआई की लगातार निकासी और टैरिफ के असर से चिंता
रेटिंग एजेंसी के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) से शुद्ध निकासी लगातार तीसरे महीने जारी रही। एफपीआई की लगातार निकासी और टैरिफ के प्रभाव को लेकर चिंता के कारण इक्विटी बाजारों के प्रदर्शन में गिरावट आई और बेंचमार्क सूचकांकों में महीने-दर-महीने आधार पर 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। एफपीआई की निकासी से रुपये पर भी दबाव बढ़ा है, जो अगस्त में डॉलर के मुकाबले 87.8 के सर्वकालिक निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है और मासिक आधार पर 1.6 प्रतिशत कमजोर हुआ है।
इक्विटी में शुद्ध निकासी अगस्त में बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, इक्विटी में शुद्ध निकासी बढ़कर 4 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई (जुलाई में 2.1 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में), जो जनवरी के बाद से सबसे अधिक है। एफपीआई ने ऋण बाजार में 0.9 अरब डॉलर की तुलना में 1.5 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया, जो पांच महीने का उच्च स्तर है। यह अमेरिकी यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों के कारण हुआ। अगस्त में 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में 13 आधार अंक (बीपीएस) की गिरावट आई और यह औसतन 4.26 प्रतिशत पर आ गया।